पार्टी बड़ी, गफलत बड़ी ! चुनाव के लिए बचे सात दिन नहीं आया भाजपा का घोषणापत्र, जनता बोली 2017 का ‘संकल्प’ क्यों रहा अधूरा ?
1 min read07/02/2022 10:16 pm
साल 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जनता को बहुत से लोक लुभावने सपने दिखाए थे। तब बीजेपी ने घोषणा पत्र में युवा, रोजगार, पलायन जैसे अहम मुद्दों को तरजीह दी थी

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देश के सबसे बड़े सियासी दल भाजपा में गफलत भी बड़ी ही हैं। उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के लिए महज सात दिन बचे है लेकिन भाजपा अपना घोषणापत्र जारी नहीं कर पायी है। हालांकि पार्टी दो फरवरी को अपना चुनाव दृष्टि जारी करनी की बात कह चुकी थी लेकिन सात फरवरी तक भाजपा का दृष्टि-पत्र-दोष बना हुआ है। हालांकि भाजपा ने सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में जनता से सुझाव प्राप्त करने के बाद घोषणा पत्र को तैयार किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के संयोजन में गठित घोषणा पत्र समिति को विधानसभा क्षेत्रों से 51279 सुझाव प्राप्त हुए, जबकि 27331 जन सुझाव उसे ऑनलाइन प्राप्त हुए। पार्टी को घोषणा पत्र के लिए कुल 78,610 सुझाव मिले हैं।
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साल 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जनता को बहुत से लोक लुभावने सपने दिखाए थे। तब बीजेपी ने घोषणा पत्र में युवा, रोजगार, पलायन जैसे अहम मुद्दों को तरजीह दी थी। मेनफेस्टों में कहा गया था कि अगर भाजपा की सरकार आई तो रिक्त पदों पर 6 माह में भर्तियां की जाएंगी। भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए सौ दिन में खंडूड़ी का लोकायुक्त एक्ट लागू करने की बात भी कही गई थी।
साल 2019 तक हर गांव में सड़क की भी बात कही गई थी। घोषणा पत्र में कहा गया था कि अगर बीजेपी की सरकार बनेगी तो मेधावी छात्रों को लेपटॉप और स्मार्टफोन दिये जायेंगे। इसके साथ ही कहा गया था कि आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्राओं को स्नातकोत्तर तक पढ़ाई के लिये निःशुल्क शिक्षा दी जाएगी। इसमें विश्व विद्यालय में फ्री वाई-फाई की बात भी जोड़ी गयी थी। भजपा के हर छोटे बड़े नेता ने अपनी इस घोषणा का खूब जिक्र किया। इस पर जमकर बहस भी हुई थी। लेकिन कार्यकाल खत्म होते-होते न लेपटॉप का ‘ल’ है न स्मार्टफोन का ‘स्’। हां फजीता न हो इसके लिए आनन-फानन में अंतिम समय में अब टेबलेट योजना शुरू हुई, जिसमें खातो में बारह हजार डालकर अपनी लाज बचाने की जुगत जरूर की है। अब एकबार फिर से भाजपा जनता के सामने है। जनता के बहुत से सवाल भाजपा को परेशान करने वाले हैं। सबसे बड़ा सवाल डबल इंजन सरकार के बाद भी सूबे में इतनी अस्थिरता क्यों ? विकास अधूरा और वायदों की नाकाफी क्यों?
दीपक बेंजवाल / अगस्त्यमुनि
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