दस्तक पहाड न्यूज देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। प्रदेश के करीब 19 लाख मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से कटने के खतरे में है। कारण है कि अब तक इन मतदाताओं का बीएलओ (BLO) मैपिंग कार्य पूरा नहीं हो पाया है। चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत घर-घर सत्यापन और बीएलओ मैपिंग की प्रक्रिया जारी है। लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने से बड़ी संख्या में मतदाता सत्यापन दायरे से बाहर हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं होगी, उन्हें नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज मांगे जाएंगे, अन्यथा उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
76 प्रतिशत बीएलओ मैपिंग पूरी – मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार प्रदेश में कुल 84,42,263 मतदाता दर्ज हैं। इनमें से अब तक लगभग 64,63,099 मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग हो चुकी है, जो कुल का करीब 76 प्रतिशत है। शेष 19,79,164 मतदाता अभी भी मैपिंग से बाहर हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान विशेष रूप से उन मतदाताओं के सत्यापन के लिए है, जिनका नाम 2003 या उससे पहले की मतदाता सूचियों में दर्ज था या जिनकी वर्तमान स्थिति की पुष्टि नहीं हो पाई है।
किन जिलों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक : जारी आंकड़ों के अनुसार कई जिलों में अभी भी बड़ी संख्या में मतदाता सत्यापन से बाहर हैं। विशेष रूप से देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल और पौड़ी जैसे बड़े जिलों में हजारों की संख्या में मतदाता बीएलओ मैपिंग से वंचित हैं। ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में घर-घर संपर्क में आ रही दिक्कतों के कारण भी कार्य प्रभावित हुआ है।
क्या होगा आगे ? चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है:
- जिन मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा।
- मतदाता को फॉर्म भरकर पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे
- निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है
मतदाताओं से अपील : निर्वाचन विभाग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क करें और सुनिश्चित करें कि उनका नाम सही तरीके से मतदाता सूची में दर्ज रहे। साथ ही मतदाता स्वयं भी NVSP पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप के माध्यम से अपनी स्थिति जांच सकते हैं। यह अभियान आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है, लेकिन यदि शेष मतदाताओं ने समय रहते सत्यापन नहीं कराया तो बड़ी संख्या में लोगों का मताधिकार प्रभावित हो सकता है।










