अगस्त्यमुनि में टैबलेट घोटला, चर्चा में फेक बिल, 500 से 2000₹ मिल रहे हैं फर्जी जीएसटी बिलों से लगा सरकार को चूना
1 min read24/03/2022 2:21 pm
दीपक बेंजवाल / अगस्त्यमुनि ।।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि में तकरीबन 2200 छात्रों को उत्तराखण्ड सरकार द्वारा निशुल्क टैबलेट दिए जाने की महत्वकांक्षी योजना पर फर्जी बिलों के जरिये पलीता लगाने की कोशिश की जा रही है। जिस प्रकार इन दिनों धडल्ले से दुकानों में फर्जी बिल बनाने की लाइनें लगी है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि ढाई करोड़ से अधिक का भुगतान इन फर्जी बिलों से होने से सरकार को 45 लाख के जीएसटी कर का नुकसान हो सकता है ।
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दरअसल उत्तराखण्ड की पिछली धामी सरकार ने कार्यकाल समाप्त होने से पहले आननफानन में स्कूल तथा महाविद्यालयों में निशुल्क टैबलेट बांटने की योजना बनाई थी, लेकिन स्वयं खरीदने के बजाय प्रत्येक लाभार्थी बच्चों के खातों में 12000 रूपये ट्रासफर कर दिए गए, लेकिन बच्चों ने इन्हें खरीदने में चालाकी दिखानी शुरू की, जिस पर सरकार ने विद्यालयी स्तर पर जांच कमेटी बनाने का आदेश दिया। लेकिन टेक्निकल एक्सपर्ट ने होने से कोई लाभ नहीं मिला। चुनाव आचार संहिता के बाद महाविद्यालयों में भी निशुल्क टैबलेट बांटे जाने थे, जिस पर पहले शपथ पत्र और बिल लाने का फरमान जारी कर दिया गया। लेकिन यहां भी वहीं घपला सामने आ रहा है, यहां छात्र बिना खरीद के बाजारों से बिल ला रहे है। दुकानदारों के सामने भी बड़ी समस्या है कि बिना खरीद के बिल देने की है, छात्र को मिलने वाला पैसा शपथ पत्र और बिल जमा करने पर ही मिलेगा, ऐसे में एडवांस में बिल देकर रिस्क कैसे ले। ऐसे में इन बिलों को देने वाले और लेने वालों ने शार्टकर्ट के जरिये पैसा बनाने की स्कीम निकाली है। दरअसल काॅलेज के अधिकांश छात्रों के पास पहले से मोबाइल है जिससे वो नया टैबलेट लेने में कंजूसी बरत रहे है, लेकिन इसके ऐवज में मिलने वाली रकम को लेने का मोह नहीं त्याग पा रहे है। जिसके चलते बाजारों से फेक बिल ले रहे है, ये बिल राशन की दुकानों से लेकर पिंटरों से भी डिजाईन किए जा रहे है। कहीं-कहीं इन बिलों में जीएसटी ही नहीं है तो कहीं ईएमआई नम्बर ही गायब है। अगर है भी तो वो पुराने मोबाईल का ही ईएमआई नम्बर चस्पा कर दिया गया है। ये बिल बड़ी आसानी से 500 से लेकर 2000 रूपये तक में बन रहे है। अब समस्या ये है कि महाविद्यालय प्रशासन जांच की बात तो कर रहा है लेकिन जीएसटी बिलों और ईएमआई नम्बरों की सत्यता को लेकर उनके पास कोई टैक्नीकल एक्सपर्ट नहीं है।

इस विषय पर जब दस्तक पत्रिका ने महाविद्यालय प्रशासन से बात की तो टैबलेट जांच को देखने वाले प्रो. बुद्धिबल्लभ त्रिपाठी ने कहा कि बिना जीएसटी और बिना ईएमआई वाले बिलों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि 25 मार्च से इन बिलों की जांच शुरू होनी है, फर्जी पाए गए सभी बिलों को सख्ती से निरस्त कर दिया जाएगा।
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