अगस्त्यमुनि। मुख्यमत्री द्वारा तहसील ऊखीमठ के अन्तर्गत राइका भीरी का नाम शहीद मुरलीधर सेमवाल के नाम पर रखने की घोषणा अभी अमल में भी नहीं आई थी कि भीरी के ग्रामीणों ने राइका भीरी का नाम बदलने के विरोध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने न तो नाम बदलने की मांग की थी और न ही नाम बदलने से पूर्व उनकी राय मांगी गई। ग्रामीणों ने राइका भीरी के नाम को यथावत रखते हुए इसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन न करने की मांग की है, यदि ऐसा न हुआ तो पूरी ग्राम पंचायत धरना प्रदर्शन के साथ ही भूख हड़ताल जैसे कदम भी उठायेंगे।

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जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि 14 अप्रैल को वैशाखी के दिन बधाणीताल मेले में जनपद में पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राइका भीरी का नाम शहीद मुरलीधर सेमवाल के नाम पर करने की घोषणा की है। राइका भीरी का नाम बदलने से भीरी के ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि नाम बदलने प्रस्ताव उनका नहीं है तथा नाम बदलने से पूर्व शासन प्रशासन ने उनकी राय भी नहीं ली। उनका मानना है कि शहीद मुरलीधर ग्राम पंचायत टेमरिया के के निवासी हैं। सरकार उनकी स्मृति में अगर स्मारक बनाना चाहती है तो टेमरिया गांव में ही बनाये। इस सम्बन्ध में ग्राम पंचायत भीरी के ग्रामीणों ने आम बैठक का आयोजन कर राइका भीरी का नाम बदलने का विरोध करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि उनके विरोध के बाबजूद भी शासन प्रशासन द्वारा राइका भीरी का नाम बदला जाता है तो ग्रामीण धरना प्रदर्शन के साथ ही अनशन भी करने को मजबूर होंगे। ज्ञापन में ग्राम पंचायत भीरी, अभिभावक संघ अध्यक्ष, दिगम्बर भण्डारी, रवीन्द्र भण्डारी, महेन्द्र मिश्रा, मिथला देवी, निर्मला, दीपा, महेश चन्द्र, श्यामलाल सहित कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। विरोध का कारण भी अजीब है, शहीद अपने गांव का नहीं तो विरोध। क्या शहीद सिर्फ अपने गांव के लिए होता है। बड़ी अजीब विडंबना है इतनी संकीर्णता के साथ आने वाली पीढ़ियों को हम यही संदेश देंगे।