दस्तक पहाड न्यूज रुद्रप्रयाग॥ बीते दिनों लगभग एक माह पूर्व गुलदार द्वारा रुद्रप्रयाग के पाली मल्ली (जोंदला) के एक व्यक्ति को अपना निवाला बनाये जाने के उपरांत, क्षेत्र में लगातार भय और दहशत का माहौल बना हुआ था, तबसे बीते शनिवार (13 दिसंबर) तक वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में सक्रिय थी। बीते शनिवार 13दिसंबर की रात्रि अचानक एक गुलदार के पिंजरे में फँसने के उपरांत खबर फैली कि जोंदला का गुलदार पकड़ा गया, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस, पूछने पर वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने भी तस्दीक़ की

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कि..”पकड़ा गया गुलदार वही है जिसने पाली मल्ली (जोंदला) में एक व्यक्ति को अपना निवाला बनाया था, लेकिन गाँव जोंदला में गुलदार पकड़े जाने की खबर के संबंध में संशय की ही स्थिति बनी हुई है,कुछ लोगों से पूछने ने पर मालूम हुआ कि “गाँव में किसी को मालूम ही नहीं कि गुलदार पकड़ा गया है, लोग ख़ाली कह रहे हैं कि गुलदार पकड़ा गया। हमारे पूछने पर पाली मल्ली (जोंदला) के ही भरत सिंह आश्चर्य व्यक्त करते हुए उल्टा हमीं से से सवाल करते हैं कि.. “सच में गुलदार पकड़ा गया? नहीं-नहीं आप मज़ाक़ कर रहे हैं,। हमारे द्वारा पिंजरे में क़ैद गुलदार क़ैद गुलदार की तस्वीर दिखाने पर बोले कि “ गाँव में किसी को मालूम ही नहीं कि गुलदार पकड़ा गया, कल रात आप देखते वहाँ गुलदारों ने क्या ऊधम मचा रखा था। ग्राम प्रधान जोंदला ‘अनिल नेगी’ जिन्हें वन विभाग के गुलदार पकड़ने वाली खबर की सत्यता के बारे में वन विभाग से पता करने पर वन विभाग के अधिकारियों द्वारा स्यालसौड़ (अगस्त्यमुनि)में गुलदार की तस्दीक़ करने हेतु ही बुलाया था, हमसे फ़ोन पर बोले कि.“ गुलदार पकड़ा गया बता तो रहे हैं..और हमने देखा कि एक गुलदार हैं वहाँ(स्यालसौड़) पिंजरे में क़ैद..मगर गाँव में किसी को भी खबर नहीं कि गुलदार पकड़ा गया? गुलदार बाक़ायदा वन विभाग के लौटने के बाद क्षेत्र में अब और भी गुर्रा-गुर्रा कर ऊधम मचा रहे हैं, वन विभाग ने कब गुलदार पकड़ा? गाँव में सबके यही सवाल हैं, इस संबंध में हमें भी कुछ अधिक खबर नहीं, हमने वन विभाग को यहाँ क्षेत्र में आकर जनता के बीच अपनी बात रखने को ही कहा है” क्योंकि सोसल मीडिया पर तैरती खबरों को सच मानकर यदि लोग स्वच्छंदता और निर्भयतापूर्वक कि “आदमखोर गुलदार पकड़ा गया है” यही सत्य मानकर रहना शुरू कर दें और हों न हो कोई और वारदात हो जाय? हम अपने लोगों का इस तरह से रिस्क नहीं उठा सकते। “वन विभाग ने कब गुलदार पकड़ा दल? कब उसे वे यहाँ से ले गए? क्या वह वही आदमखोर है? यह सब सार्वजनिक होना चाहिए”