उत्तराखंड में ‘नकल विरोधी कानून’, आजीवन कारावास से लेकर 10 करोड़ ₹ तक का जुर्माना
1 min read10/02/2023 1:57 pm
देहरादून. उत्तराखण्ड सरकार ने प्रदेश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल रोकने को लेकर कड़े कानून बनाये हैं. प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश 2023, नकल विरोधी कानून को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया. सरकार के इस अध्यादेश में दोषियों के विरूद्ध सख्त प्रावधान किए गए हैं। नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति, प्रिटिंग प्रेस, सेवा प्रदाता संस्था, प्रबंध तंत्र, कोचिंग संस्थान इत्यादि अनुचित साधनों में लिप्त पाया जाता है तो उसके लिए आजीवन कारावास तक की सजा और दस करोड़ रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. यदि कोई व्यक्ति संगठित रूप से परीक्षा कराने वाली संस्था के साथ षडयंत्र करता है तो आजीवन कारावास तक की सजा एवं 10 करोड़ रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही यदि कोई परीक्षार्थी प्रतियोगी परीक्षा में स्वयं नकल करते हुए या अन्य परीक्षार्थी को नकल कराते हुए अनुचित साधनों में लिप्त पाया जाता है तो उसके लिए तीन वर्ष के कारावास व न्यूनतम पांच लाख के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
यदि वो परीक्षार्थी दोबारा अन्य प्रतियोगी परीक्षा में पुनः दोषी पाया जाता है तो न्यूनतम दस वर्ष के कारावास तथा न्यूनतम 10 लाख जुर्माने का प्रावधान किया गया है. नये नियमों के मुताबिक यदि कोई परीक्षार्थी नकल करते हुए पाया जाता है तो आरोप पत्र दाखिल होने की तिथि से दो से पांच वर्ष के लिए डिबार करने तथा दोष सिद्ध ठहराए जाने की दशा में दस वर्ष के लिए समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं से डिबार किए जाने का प्रावधान किया गया है।
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यदि कोई परीक्षार्थी दोबारा नकल करते हुए पाया जाता है तो क्रमशः पांच से दस वर्ष के लिए तथा आजीवन समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं से डिबार किए जाने का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही ऐसे मामलों में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से अर्जित सम्पति की भी कुर्की की जायेगी. इस अधिनियम के अन्तर्गत अपराध गैर जमानती होगा।
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