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उत्तराखंड के युवा वैज्ञानिक की बड़ी उपलब्धि: रुद्रप्रयाग बसुकेदार के डॉ. शुभम चमोला को मिला IIT जोधपुर का सर्वोच्च शोध सम्मान ‘सी. वी. रमन गोल्ड मेडल’

दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि।। उत्तराखंड की शांत वादियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत में अपनी पहचान बनाने वाले युवा वैज्ञानिक डॉ. शुभम चमोला ने एक बार फिर प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है। जनपद रुद्रप्रयाग के कौशलपुर, बसुकेदार निवासी डॉ. शुभम चमोला को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के 12वें दीक्षांत समारोह में समग्र विज्ञान (Sciences) में उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए प्रतिष्ठित “सी. वी. रमन गोल्ड मेडल” प्रदान किया गया। डॉ. शुभम IIT जोधपुर के भौतिकी विभाग (Department of Physics) के पीएचडी शोधार्थी रहे हैं।यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ तथा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के अध्यक्ष एवं एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री श्री नीलकंठ मिश्रा द्वारा प्रदान किया गया। समारोह में IIT जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल और उपनिदेशक प्रो. भबानी कुमार सतपथी सहित संस्थान के वरिष्ठ शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और विशेष बना दिया।डॉ. शुभम चमोला, श्री ओमप्रकाश चमोला के सुपुत्र हैं। उनके पिता राजकीय इंटर कॉलेज, चंद्रापुरी में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले डॉ. शुभम ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और निरंतर प्रयासों के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। डॉ. शुभम चमोला ने इंटर तक की पढ़ाई चिल्ड्रन ऐकेडमी इंटर कॉलेज अगस्त्यमुनि से की है। स्थानीय लोगों, शिक्षकों एवं सामाजिक संगठनों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया है। डॉ. शुभम चमोला का शोध कार्य ऊर्जा विज्ञान और सतत प्रौद्योगिकी (Sustainable Technology) के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे मुख्य रूप से सौर ऊर्जा के संग्रहण (Solar Energy Harvesting) एवं ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) को अधिक सरल, प्रभावी, किफायती और पर्यावरण अनुकूल बनाने पर कार्य कर रहे हैं। उनका शोध भविष्य की हरित एवं टिकाऊ ऊर्जा तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि उनके शोध कार्य से अगली पीढ़ी की ऊर्जा तकनीकों को नई दिशा मिल सकती है, जो स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सहायक सिद्ध होगी।अपने शोध कार्य के दौरान डॉ. शुभम चमोला ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई उच्च प्रभाव वाले वैज्ञानिक जर्नलों (High Impact Journals) में शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। उनके शोध कार्य को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय द्वारा सराहा गया है। इसके अतिरिक्त उन्हें प्रतिष्ठित कॉमनवेल्थ फेलोशिप से भी सम्मानित किया गया। वहीं छात्र जीवन से ही उनकी शैक्षणिक प्रतिभा लगातार उभरकर सामने आती रही है। उन्हें विद्यालय एवं स्नातक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार की प्रतिष्ठित इंस्पायर फेलोशिप/स्कॉलरशिप भी प्राप्त हुई थी।

डॉ. शुभम चमोला की वैज्ञानिक प्रस्तुतियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी विशेष सराहना मिली है। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस सहित कई देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलनों में अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए और चार बार “बेस्ट प्रेजेंटेशन अवॉर्ड” प्राप्त कर भारत तथा उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया। वैज्ञानिक सम्मेलनों में उनकी प्रस्तुतियों को नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यावहारिक उपयोगिता के लिए विशेष रूप से सराहा गया। डॉ. शुभम चमोला ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज, यूनाइटेड किंगडम में लगभग एक वर्ष तक शोध कार्य किया। कैम्ब्रिज जैसे विश्वप्रसिद्ध संस्थान में कार्य करते हुए उन्होंने उन्नत ऊर्जा प्रौद्योगिकी और सौर ऊर्जा आधारित समाधानों पर महत्वपूर्ण शोध किया। इस दौरान उन्होंने आधुनिक अनुसंधान तकनीकों और वैश्विक स्तर की प्रयोगशालाओं का अनुभव प्राप्त किया।डॉ. शुभम चमोला ने कहा कि पीएचडी की यात्रा में अनगिनत देर रात तक चलने वाले प्रयोग, असफल प्रयास, कठिन चुनौतियाँ और लगातार सीखने की प्रक्रिया शामिल रही, और आज यह सम्मान उन सभी वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है।

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चिल्ड्रन एकेडमी इंटर कॉलेज अगस्त्यमुनि की प्रबंधक श्रीमती ऐश्वर्या रावत ने आईआईटी जोधपुर के 12वें दीक्षांत समारोह में डॉ. शुभम चमोला को प्रतिष्ठित ‘सी. वी. रमन गोल्ड मेडल’ मिलने पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल रुद्रप्रयाग जनपद बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि डॉ. शुभम चमोला ने अपनी मेहनत, लगन और वैज्ञानिक सोच के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं को शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी। उन्होंने कहा कि पहाड़ के युवाओं में असीम प्रतिभा है और डॉ. शुभम की उपलब्धि इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। विद्यालय प्रधानाचार्य हरिपाल कंडारी, विक्रम सिंह नेगी, हीरा सिंह नेगी सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों ने भी डॉ. शुभम चमोला को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विद्यालय परिवार ने विश्वास जताया कि डॉ. शुभम आने वाले समय में विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर उत्तराखंड का नाम और अधिक रोशन करेंगे। नगर पंचायत अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गोस्वामी सहित क्षेत्र के लोगों का कहना है कि डॉ. शुभम चमोला की सफलता उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही दिशा में प्रयास करने से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। डॉ. शुभम चमोला की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड के लिए सम्मान और प्रेरणा का क्षण है। वैज्ञानिक समुदाय को उनसे भविष्य में और भी महत्वपूर्ण शोध एवं नवाचारों की उम्मीद है, जो समाज, विज्ञान और पर्यावरण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

 

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मंगलवार, 09 जून 2026

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