दीपक बेंजवाल/ दस्तक पहाड न्यूज।। पत्थरों से राह बनातीं, आँधियों से आँख मिलातीं, संघर्ष की चट्टानों पर अपने सपने उगातीं। माँ की दुआ, मेहनत का उजाला संगत लेकर चलतीं पहाड़ की बेटियाँ हर शिखर पर पहचान लिखतीं।
तिलवाड़ा के गीड़–भूतेर गाँव की दो होनहार बेटियों ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गाँव और क्षेत्र का मान बढ़ाया है। सीमित संसाधनों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और कठिन हालातों के बावजूद इन बेटियों ने हार नहीं मानी, बल्कि संघर्ष को अपना साथी बनाकर सफलता की मंज़िल हासिल की।गीड़–भूतेर निवासी शिवानी पुरी ने अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, मंगलगिरी (आंध्र प्रदेश) में रेडियोलॉजी टेक्नीशियन पद पर चयन प्राप्त किया। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 34 हासिल कर यह सिद्ध कर दिया कि मेहनत और हौसले के आगे कोई बाधा टिक नहीं सकती। वहीं नेहा कंडारी का चयन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश में नर्सिंग ऑफिसर पद पर हुआ है, जो पूरे पहाड़ के लिए गर्व का विषय है।इन दोनों बेटियों की सफलता के पीछे उनकी माँ की अदम्य हिम्मत, दिन-रात की कड़ी मेहनत और परिवार के त्याग की बड़ी भूमिका रही है। आज शिवानी और नेहा उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं।
इस अवसर पर नगर पंचायत तिलवाड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता हैप्पी असवाल ने कहा कि पहाड़ की बेटियाँ किसी से कम नहीं हैं। यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें, तो वे हर क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू सकती हैं। उन्होंने कहा कि शिवानी पुरी और नेहा कंडारी की उपलब्धि पूरे पहाड़ के समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और यह संदेश देती है कि बेटियाँ बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं।
गीड़–भूतेर गाँव की ये दोनों बेटियाँ आज यह साबित कर रही हैं कि मेहनत, संस्कार और संकल्प के बल पर पहाड़ से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।











