हरीश गुसाई / अगस्त्यमुनि।।
रूद्रप्रयाग जनपद के खेल जगत के लिए यह एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। कबड्डी जैसे लोकप्रिय पारंपरिक खेल को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम तब सामने आया, जब जनपद के पाँच खेलप्रेमियों को राज्य स्तरीय कबड्डी रेफरी के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। यह उपलब्धि न केवल जनपद, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
यह चयन सितंबर 2025 में आयोजित राज्य स्तरीय कबड्डी रेफरी प्रशिक्षण एवं प्रमाणन कोर्स के माध्यम से हुआ, जिसका आयोजन प्रेमनगर आश्रम में किया गया था। इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से आए कुल 61 शिक्षकों, शिक्षिकाओं एवं खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। सभी प्रतिभागी विभिन्न खेलों में रुचि रखने वाले थे और कबड्डी को पेशेवर स्तर पर आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस प्रशिक्षण में शामिल हुए।इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य कबड्डी खेल के नियमों, तकनीकी पहलुओं और निष्पक्ष निर्णय प्रणाली की गहन जानकारी देना था, ताकि खेल को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा सके। प्रशिक्षण के दौरान मैच संचालन, नियमों की व्याख्या, स्कोरिंग प्रणाली, फाउल एवं निर्णय प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया के तकनीकी निदेशक श्री जगदीश्वर यादव जी एवं अंतरराष्ट्रीय तकनीकी अधिकारी श्री राणा रंजीत सिंह जी ने प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान, नियमों की बारीकियाँ और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। उनके मार्गदर्शन से प्रतिभागियों को उच्च स्तरीय रेफरी बनने का अवसर मिला।
रूद्रप्रयाग के पाँच बने स्टेट रेफरी
इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रूद्रप्रयाग जनपद के निम्नलिखित पाँच व्यक्तियों ने स्टेट रेफरी कबड्डी का गौरव प्राप्त किया—
- शिव सिंह नेगी – जिला क्रीड़ा समन्वयक
- नवेंदु मोहन सिंह रावत – व्यायाम शिक्षक
- योगम्बर कंडारी
- सुभाष नेगी
- मीना बिष्ट
इन सभी की इस उपलब्धि से जनपद में कबड्डी को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध होगा। इन पाँचों के चयन पर खेल प्रेमियों, शिक्षकों, खिलाड़ियों और स्थानीय नागरिकों में हर्ष का माहौल है। जनपद के खेल संगठनों ने इसे रूद्रप्रयाग के लिए गर्व का क्षण बताया और विश्वास जताया कि इससे जिले में कबड्डी को नई दिशा और पहचान मिलेगी। यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि रूद्रप्रयाग अब केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ही नहीं, बल्कि उच्च स्तर के खेल अधिकारियों और रेफरियों के लिए भी जाना जाएगा।











