दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि।। रुद्रप्रयाग जनपद के दूरस्थ विकासखंड जखोली स्थित छोटे से गाँव पालाकुराली के लिए गर्व का क्षण तब आया, जब राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 9 के छात्र रोहन सिंह राणा को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मिलने और प्रतिष्ठित कार्यक्रम ‘परीक्षा पर चर्चा (PPC) 2026’ में भाग लेने का अवसर मिला। रोहन ने इस मंच पर न केवल अपने विद्यालय या जनपद, बल्कि पूरे उत्तराखंड राज्य का प्रतिनिधित्व किया। एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले रोहन की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है। उनके विज्ञान शिक्षक ने उन्हें PPC 2026 के लिए वीडियो संदेश तैयार करने के लिए प्रेरित किया। रोहन ने अन्य छात्रों की तरह अपना वीडियो तैयार किया, लेकिन उनकी प्रस्तुति ने उन्हें देश की राजधानी नई दिल्ली तक पहुँचा दिया, जहाँ उन्हें पहली बार प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान रोहन ने प्रधानमंत्री को उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति से जुड़ी पारंपरिक भेंट भी अर्पित की। इसमें रिंगाल की फूलकंडी, पारंपरिक पहाड़ी मिठाई अर्से, स्थानीय व्यंजन बुखणे तथा उनके शिक्षक अश्विनी गौड़ द्वारा लिखित पुस्तक “उत्तराखंड की लोक परम्परा में विज्ञान” शामिल रही। यह पुस्तक संस्कृति प्रकाशन, अगस्त्यमुनि द्वारा प्रकाशित है और इसके प्रधानमंत्री तक पहुँचने को क्षेत्र के लिए विशेष उपलब्धि माना जा रहा है।
‘परीक्षा पर चर्चा’ के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विद्यार्थियों को तनावमुक्त, सहज और उत्सवपूर्ण परीक्षा देने का संदेश दिया, जिसने रोहन सहित देशभर के छात्रों को नई ऊर्जा दी।
रोहन ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य, माता-पिता, जनपद रुद्रप्रयाग के मुख्य शिक्षा अधिकारी पी. के. बिष्ट, डाइट प्राचार्य सी. पी. रतूड़ी, खंड शिक्षाधिकारी जखोली यशवीर सिंह रावत, एससीईआरटी उत्तराखंड के राज्य समन्वयक सुनील भट्ट, तथा कार्यक्रम की नोडल अधिकारी और निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड, श्रीमती वंदना गर्ब्याल को दिया। रोहन ने कहा कि इन सभी के मार्गदर्शन और प्रेरणा के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। उन्होंने अपने माता-पिता, शिक्षा विभाग, ग्रामवासियों और समस्त उत्तराखंडवासियों का आभार भी व्यक्त किया। रोहन की इस उपलब्धि से न केवल पालाकुराली गाँव, बल्कि पूरा रुद्रप्रयाग जनपद और उत्तराखंड राज्य गौरवान्वित महसूस कर रहा है। यह सफलता दर्शाती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती — सपने बड़े हों तो छोटे गाँव से भी बच्चे राष्ट्रीय मंच तक पहुँच सकते हैं।











