दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनी।। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इन दिनों किसान पेंशन निधि के नाम पर लागू किए गए नए अपडेट ने बुजुर्ग किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान आईडी बनाने और सत्यापन के लिए राजस्व क्षेत्रों में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में ये शिविर अक्सर मूल गांवों से काफी दूर लगाए जा रहे हैं। दूरदराज़ के गांवों में रहने वाले बुजुर्गों को इन शिविरों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। खड़ी चढ़ाई, खराब रास्ते और सीमित परिवहन सुविधाओं के कारण बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बुजुर्ग किसानों का कहना है कि किसान पेंशन निधि के नाम पर लाया गया यह नया अपडेट राहत देने के बजाय उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान कर रहा है।
केदाफघाटी निवासी शिव शंकर नेगी, महेंद्र सिंह रावत, अनसूया प्रसाद, दिलदेई देवी, मवेशी देवी सहित स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का सुझाव है कि यदि अपडेट करना ही था तो इसके लिए एक-दो बड़े शिविरों के बजाय गांव-गांव शिविर लगाए जाने चाहिए थे। इसके अलावा यह कार्य सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के माध्यम से भी कराया जा सकता था, ताकि बुजुर्गों को दूर न जाना पड़े। कुछ किसानों ने यह भी कहा कि सरकार चाहती तो इसके लिए एक ऑनलाइन एप्लिकेशन भी लॉन्च कर सकती थी, जिससे प्रक्रिया और सरल हो जाती।
देशभर में किसान सम्मान निधि और पेंशन योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में किसानों को लाभ दिया जा रहा है। अब इनके सत्यापन के नाम पर यह नया अपडेट सामने आया है, लेकिन पहाड़ों में इसका क्रियान्वयन अव्यवहारिक साबित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जीवाड़ा रोकने के नाम पर ईमानदार और बुजुर्ग किसानों को ही सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि पर्वतीय क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नीति में बदलाव किया जाए और गांव स्तर पर शिविर लगाकर या स्थानीय माध्यमों से ही सत्यापन की सुविधा दी जाए, ताकि बुजुर्ग किसानों को राहत मिल सके।


सरकार के तुगलकी फरमान से









