दस्तक पहाड़ न्यूज अगस्त्यमुनि।। उत्तराखण्ड में एक ओर जहां राज्य सरकार “चार साल बेमिसाल” कार्यक्रम के तहत नशामुक्ति का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर नए शराब ठेकों के खुलने और पुलिस पहरे में शराब बिक्री जारी रहने से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में मंत्री और अधिकारी आमजन को नशा मुक्त समाज बनाने की शपथ दिला रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। एक तरफ़ मुख्यमंत्री धामी 1 अप्रैल से उत्तराखंड में 55 नई शराब की दुकानें खोलने की तैयारी में जुटे हैं, 65 करोड़ राजस्व का टारगेट, लॉटरी से आवंटन, पार्किंग वाली जगहों पर ठेके, ताकि सुविधा से नशा घर-घर पहुंचे। ऋषिकेश और देवप्रयाग में शराब ठेकों के विरोध में स्थानीय लोग धरने पर बैठे हुए हैं। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा पुलिस तैनाती के बीच शराब की बिक्री जारी रखी जा रही है। वही आज जनपद रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि स्थित बहुउद्देशीय क्रीड़ा भवन सभागार में जनपद के मा० प्रभारी मंत्री/कैबिनेट मंत्री उत्तराखण्ड सरकार सौरभ बहुगुणा जी द्वारा उपस्थित सम्भ्रान्त जनता को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गयी। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री/विधायक रुद्रप्रयाग भरत सिंह चौधरी, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग नीहारिका तोमर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न विभागों के अधिकारीगण व सम्भ्रान्त जनता उपस्थित रही।
इधर, पहाड़ी क्षेत्रों में शराब के खिलाफ जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। रुद्रप्रयाग जनपद में 40 से अधिक गांवों ने अपने स्तर पर पूर्ण शराबबंदी लागू करने का निर्णय लिया है। गांवों में शराब के सेवन और बिक्री पर प्रतिबंध के साथ उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में नशामुक्ति के प्रति गंभीर है, तो उसे राज्य में शराब नीति पर पुनर्विचार करते हुए सख्त कदम उठाने चाहिए। “देवभूमि” में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी जोर पकड़ रही है।फिलहाल, नशामुक्ति के संकल्प और शराब बिक्री की वास्तविकता के बीच बना यह विरोधाभास सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।
एक तरफ़ मुख्यमंत्री धामी 1 अप्रैल से उत्तराखंड में 55 नई शराब की दुकानें खोलने की तैयारी में जुटे हैं, 65 करोड़ राजस्व का टारगेट, लॉटरी से आवंटन, पार्किंग वाली जगहों पर ठेके, ताकि सुविधा से नशा घर-घर पहुंचे।


चार साल बेमिसाल : मंच







