दस्तक पहाड न्यूज रुद्रप्रयाग।। व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियानों के बावजूद समाज में बाल विवाह की कुप्रथा अब भी गंभीर समस्या बनी हुई है। इसी कड़ी में एक सराहनीय कार्रवाई करते हुए महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की टीम ने एक नाबालिग बालिका का विवाह समय रहते रुकवा दिया।मामले में स्वयं बालिका ने चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी कि उसके परिजन गुपचुप तरीके से उसका विवाह करवाने जा रहे हैं। सूचना मिलते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम में केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रंजू खन्ना, सदस्य ममता शैली, दलवीर सिंह रावत, केस वर्कर अखिलेश, सामाजिक कार्यकर्ता पूजा भंडारी और तिलवाड़ा चौकी से कांस्टेबल डी.सी. पुरोहित शामिल रहे। शुरुआत में परिजनों ने टीम को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर सच्चाई सामने आई।
परिजनों ने बताया कि देहरादून में रहने के दौरान बालिका का एक गैर बिरादरी के युवक से प्रेम प्रसंग हो गया था और उसके घर से भागने की धमकी के चलते उन्होंने यह कदम उठाया। गौरतलब है कि बालिका का विवाह उसी रात संपन्न होने वाला था और सीमित लोगों को आमंत्रित किया गया था।टीम ने परिजनों को बाल विवाह की कानूनी स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि यह दंडनीय अपराध है, जिसमें दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही यूसीसी के तहत भी सख्त प्रावधानों की जानकारी दी गई।प्रशासन की सख्ती के बाद परिजनों ने तुरंत लड़के पक्ष से संपर्क कर बारात न लाने की बात कही और विवाह रोक दिया गया। विभाग ने परिजनों को सख्त चेतावनी देते हुए भविष्य में किसी भी परिस्थिति में बाल विवाह न करने के निर्देश दिए। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, इस वर्ष अब तक ऐसे 26 मामलों में हस्तक्षेप कर बाल विवाह रोके जा चुके हैं, जो जागरूकता और तत्पर कार्रवाई का सकारात्मक परिणाम है।











