दस्तक पहाड न्यूज ऋषिकेश।। ज्योतिष्पीठाधीश्वर बह्मलीन शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम समाधि संस्थानम् में 10 फरवरी 2026 को बह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री माधवाश्रम जी महाराज के विचारों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशाल विद्वत गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय धर्म संघ, उत्तराखंड प्रांत के अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश भट्ट ने की।
गोष्ठी में उत्तराखंड के अनेक पूज्य संतों और सुप्रसिद्ध विद्वानों ने प्रतिभाग कर जगतगुरु माधवाश्रम जी के जीवन, उनके सिद्धांतों और सनातन धर्म के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. ओमप्रकाश भट्ट ने कहा कि पूज्य शंकराचार्य माधवाश्रम जी ने अपना संपूर्ण जीवन सनातन धर्म की रक्षा और उत्थान के लिए समर्पित किया। उन्होंने गौ, गंगा, गायत्री, रोटी, बेटी और चोटी जैसे सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा का संदेश पूरे देश में पहुँचाया। उन्होंने कहा कि उनके ब्रह्मलीन होने के बाद संत समाज स्वयं को हताश और निराश महसूस कर रहा है, लेकिन उनके विचार ही आगे का मार्ग प्रशस्त करेंगे। जगतगुरु माधवाश्रम जी के वरिष्ठ शिष्य महंत अभयचैतन्य जी ने कहा कि गुरुदेव के ब्रह्मलीन होने के पश्चात उनके प्रतिनिधि के लिए कई नाम प्रस्तावित हुए थे, किन्तु परिस्थितियोंवश उस समय नियुक्ति नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विद्वानों को पूर्ण अधिकार है कि वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद हेतु किसी सुयोग्य दंडी स्वामी का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसी क्रम में उन्होंने पूज्य जगतगुरु देवादित्यानंद जी महाराज का नाम गुरुदेव के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तावित किया। उन्होंने कहा कि देवादित्यानंद जी तपोनिष्ठ एवं शास्त्रनिष्ठ जीवन व्यतीत कर रहे हैं और गुरुपरंपरा के योग्य संवाहक हैं। इस प्रस्ताव को विद्वत सभा ने ध्वनिमत से पारित किया। जगतगुरु देवादित्यानंद जी महाराज ने अपनी सहमति देते हुए कहा कि वे पूर्ण मनोयोग से गुरुदेव के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का संकल्प था— “गौ, गंगा, गायत्री, रोटी, बेटी और चोटी की रक्षा से ही सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा” — और वे सभी संतों व विद्वानों के सहयोग से इस संकल्प को आगे बढ़ाएंगे।
ज्योतिष पीठ के व्यास एवं सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शिव प्रसाद ममगाँई जी ने भी देवादित्यानंद जी महाराज को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद के लिए प्रस्तावित किया। सभा में उपस्थित सभी विद्वानों ने ध्वनिमत से उन्हें इस पद के लिए अंगीकृत किया। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही शुभ मुहूर्त में देवादित्यानंद जी महाराज का विधिवत अभिषेक किया जाएगा।
डॉ. जनार्दन कैरवान के संचालन में आयोजित इस गोष्ठी में केशव स्वरूप ब्रह्मचारी, दंडी स्वामी श्री विज्ञानानंद तीर्थ, प्रधानाचार्य डॉ. ओम प्रकाश पूर्वाल, सुरेन्द्र दत्त भट्ट, कृष्ण प्रसाद उनियाल, विजय जुगलान, नवीन भट्ट, विनायक भट्ट, आचार्य शिव स्वरूप नौटियाल, सर्वात्मानंद गिरि, नागेंद्र पुरी, आचार्य राकेश बहुगुणा, आचार्य राकेश लसियाल, शैलेन्द्र मिश्रा, एल.पी. पुरोहित, आचार्य सुभाष डोभाल, वैदिक ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष आचार्य जगमोहन मिश्रा, महामंत्री आचार्य शिव प्रसाद सेमवाल, विनोद गैरोला, आचार्य जितेन्द्र भट्ट, रमाबल्लभ भट्ट, घनश्याम नौटियाल, अमित कोठारी, सौरभ सेमवाल, मुकेश थपलियाल, वेदकिशोर सिलसवाल, डॉ. दयाकृष्ण, आचार्य ललित त्रिपाठी, गंगाराम व्यास, हर्ष मणि पैन्यूली सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। गोष्ठी का समापन सनातन धर्म की एकता, परंपरा की निरंतरता और गुरुपरंपरा के संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ।











