दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि। चंद्रकुंवर बर्त्वाल स्मृति साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मेला तथा उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी स्वर्गीय अवतार सिंह राणा स्मृति समारोह गुरुवार को अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज अगस्त्यमुनि में आयोजित किया गया। समारोह में साहित्य, संस्कृति और उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता से नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं से भी है। उन्होंने कहा कि चंद्रकुंवर बर्त्वाल जैसे साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पहाड़ की संवेदनाओं, संस्कृति और जनजीवन को शब्द दिए। वहीं उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों का संघर्ष राज्य निर्माण की नींव में शामिल है।उत्तराखंड राज्य अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि राज्य निर्माण के आंदोलन में अनेक लोगों ने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर उत्तराखंड के भविष्य के लिए संघर्ष किया। आंदोलनकारियों के योगदान को केवल स्मृति समारोहों तक सीमित न रखकर उनके आदर्शों और विचारों को सामाजिक जीवन में उतारने की जरूरत है। उन्होंने चंद्रकुंवर बर्त्वाल के साहित्य को उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके साहित्य के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता नीलकंठ भट्ट ने कहा कि साहित्य और संस्कृति किसी भी समाज की पहचान होती है। क्षेत्र के साहित्यकारों और सांस्कृतिक विभूतियों को याद करने के साथ उनकी रचनाओं और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।समारोह में कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल के साहित्य, व्यक्तित्व और उनकी विशिष्ट रचना-धर्मिता को अकादमिक विमर्श में प्रतिष्ठित करने के लिए प्रोफेसर मृदुला जुगरान, सेवानिवृत्त डीन, भाषा संकाय, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल को ‘हिमवंत साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने आयोजको धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कवि के काव्य संग्रह पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनकी रचनाओं पर कई शोध हो चुके हैं और अभी शोधकर्ताओं के लिए कई विषय हो सकते हैं।वहीं उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए चले ऐतिहासिक राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कल्याण सिंह पुंडीर को उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी स्वर्गीय अवतार सिंह राणा स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं साहित्यकार चंद्रशेखर बेंजवाल की पुस्तक ‘उत्कंठा’ का भी इस अवसर पर विमोचन किया गया। समारोह में नगर पंचायत अगस्त्यमुनि के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गोस्वामी, खंड शिक्षा अधिकारी अगस्त्यमुनि तनुजा देवराड़ी, कार्यक्रम संयोजक एवं प्रधानाचार्य राइका अगस्त्यमुनि संजय सजवाण समेत अन्य अतिथियों ने भी विचार रखे।इस अवसर पर चंद्रकुंवर बर्त्वाल स्मृति शोध संस्थान के अध्यक्ष हरीश गुसाईं ने कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल के व्यक्तित्व, साहित्य और रचना-धर्मिता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने आयोजन के उद्देश्यों और संस्थान की गतिविधियों की जानकारी देने के साथ ही सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
चंद्र कुंवर बर्त्वाल स्मृति मेले में प्रतिभाओं ने बटोरी वाहवाही, विजेताओं को किया पुरस्कृत
इस अवसर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया और अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।कविता पाठ जूनियर वर्ग में चिल्ड्रन एकेडमी की अनुष्का ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रियांशी द्वितीय, इप्सिता तृतीय, नेहा चतुर्थ और आस्था पंचम स्थान पर रहीं।कविता पाठ सीनियर वर्ग में खुशी कंडारी ने प्रथम स्थान हासिल किया। अनुजा सेमवाल द्वितीय, आईशा तृतीय, निधि चतुर्थ और सक्षम पंचम स्थान पर रहे।प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में आरव राणा ने प्रथम, अंशिका राणा ने द्वितीय, कमल नेगी ने तृतीय, अभिज्ञान सिंह ने चतुर्थ तथा अंशिका गौड़ ने पंचम स्थान प्राप्त किया।पोस्टर प्रतियोगिता के सीनियर ग्रुप में ईशा चौधरी प्रथम, काजल नेगी द्वितीय, तनुज तृतीय, अतीक्ष नेगी चतुर्थ और दीपिका पंचम स्थान पर रहीं।वहीं पोस्टर प्रतियोगिता के जूनियर ग्रुप में अनुभव ने प्रथम, कृष गुसाईं ने द्वितीय, आर्यन कांत ने तृतीय, आयुषी वर्त ने चतुर्थ और आरुषी ने पंचम स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिताओं के सभी विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर केदारनाथ दास सेवा मण्डल के सहयोग से बेलपत्र के पौधे का रोपण भी किया गया।इस समारोह में सुन्दर सिंह राणा, आशुतोष भण्डारी, डाक्टर रेशमा पंवार, पृथ्वीपाल रावत सहित समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों और क्षेत्रीय लोगों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन कुसुम भट्ट एवं गंगाराम सकलानी ने संयुक्त रूप से किया।









