दस्तक पहाड़ न्यूज अगस्त्यमुनी।। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, साहित्य और रंगकर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से इन्द्रमणि बडोनी सम्मान-समारोह 2026 का आयोजन 18 अगस्त को देहरादून में किया जाएगा। समारोह में संस्कृति कर्मी, रंग कर्मी एवं शिक्षाविद् प्रोफेसर दाता राम पुरोहित को सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम का आयोजन दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, देहरादून में मंगलवार, 18 अगस्त को अपराह्न 3 बजे से होगा। समारोह के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक एवं ‘गढ़रत्न’ श्री नरेंद्र सिंह नेगी होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल करेंगी।समारोह में पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ‘मैती’ विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. राकेश जोशी, प्रोफेसर एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाला, अपने विचार रखेंगे।कार्यक्रम में आचार्य सच्चिदानंद जोशी एवं शिक्षाविद् तथा रंगकर्मी श्री बालकृष्ण नौटियाल का सान्निध्य रहेगा। समारोह का संचालन गिरीश बडोनी करेंगे।आयोजकों के अनुसार, यह सम्मान समारोह उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, साहित्य और रंगकर्म के क्षेत्र में योगदान देने वाली विभूतियों के कार्यों को सम्मान देने तथा नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।समारोह का आयोजन इन्द्रमणि बडोनी चेरिटेबल फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है। प्रो. दाता राम पुरोहित के सम्मान को लेकर साहित्य, संस्कृति और रंगकर्म से जुड़े लोगों में उत्साह है।
उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाले प्रो. डी. आर. पुरोहित
मूल रूप से रुद्रप्रयाग जनपद के क्वीली गांव निवासी प्रोफेसर डी. आर. पुरोहित उत्तराखंड की लोक कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण कार्य करते रहे हैं। वे केन्द्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय में अंग्रेजी और लोक कला संस्कृति निष्पादन केन्द्र के डीन भी रह चुके हैं।प्रो. पुरोहित ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं को देश-दुनिया के मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने चक्रव्यूह मंचन, पाण्डव नृत्य,ढोल सागर, नंदा देवी राजजात एवं उससे जुड़े जागरों तथा चमोली जनपद की रम्माण जैसी विशिष्ट लोक परंपराओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए उल्लेखनीय कार्य किया। चमोली की रम्माण को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में विश्व स्तर पर पहचान मिलने में भी उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जाता है। लोक संस्कृति के गहन अध्येता के रूप में उन्होंने उत्तराखंड की मौखिक परंपराओं, लोक संगीत, लोक नाट्य और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक स्तर पर स्थापित करने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का कार्य किया।रुद्रप्रयाग के क्वीली गांव से निकलकर लोक कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले प्रो. डी. आर. पुरोहित का सम्मान पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।


संस्कृति और रंगकर्म के पुरोधा









