दस्तक पहाड न्यूज देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी खजाने से दोहरी पेंशन लेने वाले अपात्र लाभार्थियों की खैर नहीं बची है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घोटाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उन्होंने अपात्र पेंशनभोगियों से अवैध रूप से ली गई राशि की वसूली (रिकवरी) और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। साथ ही, सभी जिलाधिकारियों से अपात्रों की विस्तृत रिपोर्ट मांग ली गई है।यह मामला भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की जांच में सामने आया था, जिसमें खुलासा हुआ कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त 1,377 कर्मचारी अपनी नियमित पेंशन के अलावा समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन या अन्य योजनाओं का भी लाभ अनुचित रूप से उठा रहे थे। यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है, क्योंकि सरकारी पेंशन प्राप्त करने वाले व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के पात्र नहीं होते।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार (21 फरवरी 2026) को उच्च अधिकारियों के साथ बैठक में इस मामले की गहन समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि:
- – सभी 1,377 संदिग्ध मामलों का जनपदवार सत्यापन कराया जाए।
- – अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों की पेंशन तत्काल प्रभाव से बंद की जाए (पहले ही 970 मामलों में पेंशन रोकी जा चुकी है)।
- – अवैध रूप से प्राप्त राशि की पूर्ण वसूली सुनिश्चित की जाए।
- – दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ विधिक कार्रवाई (मुकदमा) शुरू की जाए।
- – हर स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताएं न हों।
समाज कल्याण विभाग ने पहले ही शासन को वसूली का प्रस्ताव भेजा है, और अब मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद कार्रवाई तेज हो गई है। सीएम धामी ने कहा कि सरकार पारदर्शिता और शून्य सहिष्णुता की नीति पर चल रही है। जरूरतमंदों को पेंशन का लाभ मिले, इसके लिए फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।यह फैसला उन हजारों वास्तविक लाभार्थियों के हित में है जो एक-एक रुपये की पेंशन के लिए संघर्ष करते हैं, जबकि कुछ लोग अनुचित लाभ उठा रहे थे। सरकार का यह कदम राज्य में सामाजिक न्याय और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


उत्तराखंड में दोहरी पेंशन के









