दस्तक पहाड न्यूज देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में मार्च का महीना अक्सर हलचल भरा माना जाता रहा है। राज्य के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रम इसी महीने में सामने आए हैं। इसी बीच अब भाजपा के भीतर भी बयानबाज़ी ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भले ही संगठन में सब कुछ सामान्य होने का दावा कर रहे हों, लेकिन समय-समय पर पार्टी के ही कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा सरकार और संगठन पर सवाल खड़े किए जाते रहे हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे और बिशन सिंह चुफाल सहित कई नेता पहले भी अपनी ही सरकार को लेकर असहज बयान दे चुके हैं। इसी कड़ी में अब बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता अजेंन्द्र अजय के बयानों ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।अजेंद्र अजय ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर भाजपा संगठन की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि पार्टी का स्वरूप धीरे-धीरे बदलता जा रहा है और जिस विचारधारा के आधार पर संगठन खड़ा हुआ था, वह भी बदलती नजर आ रही है। अजय ने यह भी संकेत दिया कि ऐसी परिस्थितियों में राजनीति से संन्यास लेना ही बेहतर विकल्प लगता है।अजय की इस टिप्पणी के बाद प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति यदि इस तरह की विचारधारा सार्वजनिक रूप से व्यक्त करता है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह कोई भी क्यों न हो। उनका कहना था कि ऐसी सोच रखने वाला व्यक्ति भाजपा का कार्यकर्ता हो ही नहीं सकता।
प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद कयास लगाए जाने लगे कि संगठन अजेन्द्र अजय के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। हालांकि भट्ट के बयान के कुछ ही घंटों बाद अजेन्द्र अजय की एक और पोस्ट सामने आई, जिसमें उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर नाराजगी जाहिर की।अपनी ताजा पोस्ट में अजय ने लिखा कि प्रदेश अध्यक्ष की ओर से उन्हें दो मिस कॉल आई थीं, जिसके बाद दोनों के बीच लगभग तीन मिनट तक फोन पर बातचीत भी हुई। अजय के मुताबिक उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन बाद में मीडिया और सोशल मीडिया में आया बयान उन्हें बेहद आपत्तिजनक लगा। अजय ने सवाल उठाया कि उन्होंने आखिर कब कहा कि वह दुखी या परेशान हैं। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किस आधार पर की जाएगी, जब वह पहले ही कह चुके हैं कि ऐसी परिस्थितियों में संन्यास लेना ही उचित विकल्प है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्ष को भी भाजपा पर हमला बोलने का मौका मिल गया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी अपने वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की बात सुनने के बजाय उन्हें दरकिनार कर रही है।अब देखना होगा कि इस बयानबाज़ी के बाद भाजपा संगठन क्या कदम उठाता है और यह सियासी विवाद आगे क्या मोड़ लेता है।


भाजपा में सब ठीक नहीं?









