दीपक बेंजवाल/ दस्तक पहाड न्यूज।। लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के चर्चित गीत की पंक्ति “आज ये दल मा, भोल यै दल…” इन दिनों रुद्रप्रयाग की सियासत में जिला पंचायत की खलियान सीट से सदस्य ग्यालू लाल के राजनीतिक सफर पर खूब सटीक बैठती नजर आ रही है। पांच दिन पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ग्यालू लाल अब एक बार फिर कांग्रेस में लौट आए हैं।
ग्यालू लाल ने 14 अक्टूबर को भाजपा का दामन थामा था। भाजपा में शामिल होने के दौरान उन्होंने पार्टी और नेतृत्व के पक्ष में जमकर कसीदे पढ़े थे। इस मौके पर वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत ने फूल-माला पहनाकर उनका भाजपा में स्वागत किया था। उस समय उनके भाजपा में शामिल होने को लेकर स्थानीय राजनीति में खूब चर्चा हुई थी। लेकिन सियासत ने महज पांच दिन में फिर करवट ले ली। अब ग्यालू लाल भाजपा छोड़कर दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। कांग्रेस में उनकी वापसी का स्वागत पार्टी के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र बिष्ट और प्रदीप थपलियाल ने किया। दोनों नेताओं ने ग्यालू लाल को कांग्रेस का तिरंगा पट्टा पहनाकर उनका ‘घर वापसी’ के रूप में स्वागत किया।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू कांग्रेस की बदली हुई भाषा है। कल तक जिस ग्यालू लाल को कांग्रेस के मंचों से गरियाया जा रहा था, आज वही ग्यालू लाल भाजपा के ‘चक्रव्यूह’ को भेदकर कांग्रेस में लौटने वाले ‘अर्जुन’ बताए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसी बदली हुई तस्वीर को लेकर तरह-तरह के कटाक्ष किए जा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि ग्यालू लाल का भाजपा में जाना डीपीसी चुनाव की रणनीति का हिस्सा था और कांग्रेस ने पूरा राजनीतिक ‘चक्रव्यूह’ तैयार किया था। पार्टी नेताओं का कहना है कि डीपीसी सदस्य बनने के उद्देश्य से भाजपा में गए ग्यालू लाल आखिरकार कांग्रेस में वापस आ गए।अब सवाल यह भी उठ रहा है कि पांच दिन पहले जिस भाजपा के लिए कसीदे पढ़े जा रहे थे, उसी भाजपा से इतनी जल्दी मोहभंग कैसे हो गया? और जिस नेता को कल तक कांग्रेस में निशाने पर लिया जा रहा था, वही आज कांग्रेस के ‘अर्जुन’ कैसे बन गए?
ग्यालू लाल की इस तेज राजनीतिक आवाजाही ने रुद्रप्रयाग की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं को जरूर गर्म कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इसे लेकर तरह-तरह के व्यंग्य कर रहे हैं। सियासत का यह रंग देखकर नरेंद्र सिंह नेगी की पंक्ति फिर याद आती है— “आज ये दल मा, भोल यै दल…”


“आज ये दल मा, भोल








