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उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े से दिव्यांग कोटे की नौकरियां हासिल करने के मामले में आरोपी 234 शिक्षकों पर मुकदमे होंगे दर्ज

दस्तक पहाड न्यूज देहरादून: उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य गठन के बाद से अब तक दिव्यांग कोटे (दिव्यांगजन आरक्षण) के तहत नियुक्त सभी 234 प्रवक्ताओं (लेक्चरर्स) की दिव्यांगता की दोबारा मेडिकल जांच कराई जाएगी। यह जांच एम्स ऋषिकेश के विशेष मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाएगी, जो 7 मार्च 2026 से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगी।

शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, जांच सप्ताह में दो दिन (प्रत्येक बृहस्पतिवार और शनिवार) सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक होगी। एक दिन में अधिकतम 50 प्रवक्ताओं की जांच की जाएगी। सभी संबंधित प्रवक्ताओं को एम्स ऋषिकेश में निर्धारित तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य होगा। जांच में शामिल न होने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मुख्य आरोप यह है कि कुछ प्रवक्ताओं ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाकर दिव्यांग कोटे का गलत लाभ उठाया और सरकारी नौकरी हासिल की। दिव्यांग अधिकारों से जुड़ी संस्थाओं और जनहित याचिकाओं के माध्यम से यह मामला उजागर हुआ। पहले भी शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाणपत्रों के कई मामले सामने आए थे, जैसे कि कुछ समय पहले 51 शिक्षकों के फर्जी प्रमाणपत्र का खुलासा हुआ था, जिसके बाद नोटिस जारी किए गए थे।अब शिक्षा विभाग ने सख्ती बरतते हुए राज्य भर के सभी जिलों से इन 234 प्रवक्ताओं के नाम मंगवाए हैं और एम्स ऋषिकेश को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। यदि जांच में कोई प्रवक्ता फर्जी प्रमाणपत्र का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें नौकरी रद्द करना भी शामिल हो सकता है। यह कदम दिव्यांग कोटे की पवित्रता बनाए रखने और वास्तविक दिव्यांगजनों को उनका हक दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग का कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आरक्षण का दुरुपयोग न हो।

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