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बाबा केदारनाथ की सौगंध के साथ तुंलगा गाँव में मातृशक्ति ने शराब के खिलाफ फूका बिगुल, प्रतिबंध के साथ लगाया दण्ड

दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि।। “नशा नहीं रोजगार दो, शराब छोड़ो जीवन जोड़ो” के नारों और बाबा केदारनाथ, मां राजराजेश्वरी तथा इष्टदेव जाखराजा की सौगंध के साथ केदारघाटी के एक गांव ने नशामुक्त समाज की दिशा में बड़ा और प्रेरणादायक कदम उठाया है।

जनपद रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ विकास खंड की ग्राम पंचायत तुलंगा में ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए सभी सार्वजनिक तथा मांगलिक कार्यक्रमों में शराब और अन्य सभी नशीले पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।ग्रामसभा में यह भी तय किया गया कि यदि कोई व्यक्ति इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उससे भारी जुर्माना वसूला जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम गांव की सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।गौरतलब है कि तुलंगा एक सैनिक बहुल गांव के रूप में भी जाना जाता है। गांव के लगभग 85 युवा वर्तमान में सेना, पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों में देश सेवा कर रहे हैं। ऐसे सैनिकों के गांव में नशे की प्रवृत्ति को समाप्त करने के उद्देश्य से ग्रामीणों ने यह संकल्प लिया कि अब गांव में किसी भी सार्वजनिक या मांगलिक अवसर पर शराब नहीं परोसी जाएगी।इस सामाजिक पहल में महिला मंगलदल अध्यक्ष रचना देवी, ग्राम प्रधान सरिता देवी, युवक मंगलदल अध्यक्ष सुनील राणा तथा क्षेत्र पंचायत सदस्य बीरेंद्र नेगी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. चरण सिंह केदारखंडी, तालतौली मंदिर समिति अध्यक्ष कलम सिंह राणा, गोविंद सिंह राणा, जय जाखराज पूर्वसैनिक संगठन के अध्यक्ष ओंकार सिंह धीरवान, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कुंवर सिंह राणा, सेन सिंह नेगी, मदन रावत सहित गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने भी इस निर्णय का समर्थन किया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से बाबा केदारनाथ और मां राजराजेश्वरी की सौगंध खाकर संकल्प लिया कि गांव में किसी भी प्रकार के नशे को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा और समाज को नशामुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

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गौरतलब है कि 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले केदारघाटी की महिलाओं द्वारा उठाया गया यह कदम सामाजिक जागरूकता और महिला शक्ति का सशक्त उदाहरण माना जा रहा है।देवभूमि की सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए केदारघाटी से उठी मातृशक्ति की यह हुंकार अब पूरे उत्तराखंड में नशामुक्त समाज और शराबबंदी की मांग को नई दिशा देती दिखाई दे रही है।

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