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आज से खुलेंगे चमोली स्थित विश्व प्रसिद्ध “फूलों की घाटी” द्वार, रंग-बिरंगे फूलों से हर पखवाड़े बदलता है नजारा

दस्तक पहाड न्यूज चमोली।। फूलों के बारे में कुछ ऐसा है, जिसे अगर आप एक बार देख लें तो तन और मन दोनों को एक अलग ही सुकून पहुंचता है। वैसे आपने अभी तक सिर्फ एक फूल या फ्लावर का गुच्छा देखा होगा, लेकिन कभी फूलों की घाटी के बारे में सुना है, जहां दूर-दूर तक बस आपको रंग-बिरंगे फूल दिखाई दे रहे हो? जी हां, उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है, जिसे ‘फ्लावर ऑफ वैली’ कहते हैं। ये वैली चमोली क्षेत्र में पड़ती है, जो साल में केवल बार 3 से 4 महीने के लिए खुलती है।बता दें, ये घाटी विश्व धरोहर स्थल की लिस्ट में भी शामिल है, मतलब अब आप समझ सकते हैं कि इस घाटी की खूबसूरती का महत्व कितना है। अगर आप ट्रेकिंग का प्लान बना रहे हैं और शांति सी जगह पर प्रकृति का मजा लेना चाहते हैं, तो चलिए आपको इस जगह के बारे में और जानकारी देते हैं।यूनेस्को द्वारा घोषित है विश्व धरोहर स्थल : उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी सबसे प्राकृतिक, खूबसूरत और जैविक विविधता की वजह से 2005 में इसे यूनेस्को स्वरा विश्व धरोहर घोषित किया गया था। बता दें, ये घाटी 87.5 वर्ग किमी में फैली हुई है, जो न केवल भारत के लोगों को बल्कि दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। फूलों की घाटी में दुनियाभर में पाए जाने वाली फूलों की 500 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। अच्छी बात तो ये है, आज भी ये जगह रिसर्चर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।स्वर्ग सी खूबसूरत घाटी को ढूंढने के लिए शायद आप इनका धन्यवाद कर सकते हैं! वनस्पति शास्त्री फ्रेक सिडनी स्माइथ जब कामेट पर्वतारोहण से वापस आ रहे थे, तो रास्ते में भटक गए, भटकते हुए वो फूलों की घाटी पहुंचे। फूलों से खिली सजी इस जन्नत जैसी घाटी को देख वो मंत्रमुग्ध हो उठे। 1937 में फ्रेक एडिनेबरा बाटनिकल गार्डन की तरफ से फिर से इस घाटी में आए और तीन महीने तक यहां रहे। उन्होंने वैली और फ्लावर्स पर एक किताब भी लिखी, इस तरह पूरे विश्व को इस घाटी के बारे में पता चला। रोचक बात तो ये है, हर 15 दिन में आपको इस घाटी का रंग बदलता हुआ दिखाई देगा।500 से अधिक प्रजातियां हैं यहां : फूलों की घाटी में आपको 500 से अधिक प्रजातियां देखने को मिलेंगी, यहां मतलब जैव-विविधता का खजाना है। यहां पोटोटिला, प्राइमिला, एनिमोन, एमोनाइटम, ब्लू पापी, मार्स मेरी गोल्ड, फैन कमल जैसे कई तरह के फूल उगते हैं। बता दें, अगस्त-सितंबर के महीने में तो यहां सबसे ज्यादा फूल खिलते हैं। घाटी में दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु, वनस्पति, जड़ी बूटियों का संसार बसता है। घाटी जून से लेकर अक्टूबर तक खुली रहती है।

1 जून से 31 अक्टूबर तक खुली है घाटी:  अगर आप फूलों की घाटी का दीदार करना चाहते हैं, तो बता दें इसे पर्यटकों के लिए 1 जून से खोल दिया गया है। 31 अक्टूबर का दिन इसके खुलने का आखिरी दिन होगा। फूलों के साथ-साथ यहां हजारों में तितलियाँ भी बसती हैं। बता दें, घाटी में कस्तूरी मृग, मोनाल, हिमालय का काला भालू, गुलदार, हिम तेंदुएं भी रहते हैं।

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कैसे पहुंचे फूलों की घाटी: फूलों की घाटी पहुंचने के लिए आपको बद्रीनाथ हाइवे से गोविंदघाट तक जाना होगा। यहां से तीन किमी सड़क मार्ग से पुलना तक जाना है और 11 किमी की दूरी पर आपको पैदल ट्रेकिंग करनी होगी, जो हेमकुंड यात्रा के बेस कैंप से शुरू होकर घाघरिया तक जाएगी। यहां से तीन किमी की दूरी पर फूलों की घाटी स्थित है। फूलों की घाटी जाने के लिए पर्यटकों को बेस कैंप घांघरिया से ही खाने का जरूरी समाना ले जाना होता है, क्योंकि वहां कोई दुकानें नहीं हैं। ध्यान रहे यहां जाने के लिए भारतीयों को 150 रुपए और विदेशियों को 600 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस देनी पड़ती है।

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