दीपक बेंजवाल / अगस्त्यमुनि।। जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर दावा किया गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखोली में सेवा, सुशासन एवं समर्पण अभियान के तहत जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देशन में तीसरा विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर आयोजित किया जा रहा है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि तीन दिवसीय शिविर में मंगलवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के अस्थि रोग एवं ईएनटी विशेषज्ञ अपनी सेवाएं देंगे।
लेकिन जिला प्रशासन द्वारा जारी शिविर की तस्वीरों और चिकित्सकों की पहचान पर सवाल उठने लगे हैं। तस्वीरों में दिखाई दे रहे चिकित्सकों में दो डॉक्टर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अगस्त्यमुनि में तैनात फिजीशियन एवं बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जबकि एक चिकित्सक जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग की बाल रोग विशेषज्ञ हैं। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि जब ये चिकित्सक श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से नहीं हैं, तो उन्हें उसी संस्थान के विशेषज्ञ बताकर प्रचार क्यों किया गया?
मामले को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित जानकारी तथ्यात्मक होनी चाहिए। यदि विशेषज्ञ चिकित्सक स्थानीय अस्पतालों से भेजे गए हैं तो उनकी वास्तविक तैनाती का उल्लेख किया जाना चाहिए, ताकि जनता को सही जानकारी मिल सके।
इधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अगस्त्यमुनि पहले से ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं और सीमित डॉक्टरों के भरोसे ओपीडी, इमरजेंसी तथा नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन हो रहा है। हाल ही में नगर उद्योग व्यापार मंडल अगस्त्यमुनि के अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह नेगी, सभासद श्रीनंद जमलोकी, हरिहर रावत, मनोज राणा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल में तैनात डाक्टरों को कैम्पों में न भेजने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित तैनाती की मांग की। ज्ञापन में कहा गया था कि अस्पताल में प्रतिदिन 400 से 500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं और विशेषज्ञ सेवाओं की निरंतर आवश्यकता बनी रहती है। ऐसे में स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों को अन्य स्थानों पर शिविरों में भेजे जाने से अगस्त्यमुनि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे स्पष्ट करें कि शिविर में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों की वास्तविक तैनाती क्या है और आधिकारिक प्रचार सामग्री में उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के विशेषज्ञ क्यों बताया गया। सरकारी सूचनाओं में पारदर्शिता और तथ्यात्मकता बनाए रखना जनविश्वास के लिए आवश्यक है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. पारूल गोयल ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखोली में आयोजित विशेषज्ञ हेल्थ कैंप में 98 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई, जिसमें से 08 हाइपरटेंशन व 13 मधुमेह से ग्रसित मिले, जिन्हें स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का परामर्श देने के साथ-साथ व दवा वितरित की गई। इसके अलावा 05 की कैंसर स्क्रीनिंग, 13 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग, 07 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच व 85 की माहवारी स्वच्छता, पोषण देखभाल व स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न मामलों में काउंसलिंग की गई। की गई। 22 लोगों के एक्सरे तथा 73 की विभिन्न लैब जांचें की गई। इसके अतिरिक्त 07 ग्रामीणों की आभा आईडी व 02 ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। शिविर में फिजीशियन डाॅ. विकास, बालरोग विशेषज्ञ डाॅ. हेमा असवाल, डाॅ. आशा, दृष्टिमितिज्ञ राजेश पुरोहित, फार्मेसिस्ट प्रदीप शाह, डीईओ हेमंत नौटियाल, बीएलए सुधीर शुक्ला, एक्सरे टैक्नीशियन नितिन राणा, लैब टैक्नीशियन अनूप रावत, डेंटर हाइजीनिस्ट शैलेंद्र बर्तवाल आदि मौजूद रहे।


झूठ फैलाकर वाहवाही ? जिला









