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सीमा पर जवान, लेकिन घर असुरक्षित ! सैनिक ने खुद सुनाई आपबीती, आखिर क्या अब सैनिक परिवार की पुकार सुनेगा प्रशासन और जनप्रतिनिधि ?

दीपक बेंजवाल / अगस्त्यमुनि ।। देशभर में सेना के जवानों के सम्मान और उनके बलिदान की बातें होती हैं। लेकिन रुद्रप्रयाग जनपद के ग्राम पंचायत तालजामण के जंगरयाण तोक में एक सैनिक परिवार पिछले एक वर्ष से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का दर्द झेल रहा है।

बीते वर्ष अगस्त माह में बसुकेदार क्षेत्र में आई भीषण आपदा ने तालजामण ग्राम पंचायत में भारी तबाही मचाई थी। जंगरयाण तोक के करीब 10 परिवार प्रभावित हुए थे, जिनमें गढ़वाल राइफल्स में तैनात सैनिक आशीष राणा और जीतपाल सिंह राणा का परिवार भी शामिल है। दोनों भाई देश की सीमाओं पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जबकि गांव में उनकी 68 वर्षीय बुजुर्ग मां गौरा देवी, चाची और अन्य परिजन भय के साये में जीवन गुजार रहे हैं।पिछले साल हुए भूस्खलन से मकान के आगे की जमीन खिसक गई थी और इस वर्ष लगातार हो रही बारिश के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई है। गौशाला और शौचालय पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, मकान का आंगन बह गया है और घर कभी भी खतरे में आ सकता है। परिवार दिन में किसी तरह अपने घर में रहता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही रात दूसरे घरों में बिताने को मजबूर है।सैनिक आशीष राणा छुट्टी लेकर गांव पहुंचे और उन्होंने ग्राम प्रधान को स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी के जनता दरबार में भी प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन अभी तक मौके पर न तो अधिकारी पहुंचे और न कोई नेता जी। पिछले साल भी उनकी अनदेखी हुई थी इस बार सुरक्षा कार्य के साथ परिवार को सुरक्षित स्थान पर बसाने की कोई पहल उन्हें दरकार है। उनका कहना है कि अन्य प्रभावितों की तरह उन्हें भी विस्थापन दिया जाना चाहिए। उन्होंने भी जीवन की जमापूंजी लगाकर मकान बनाया था, आज उनका परिवार डर के साये में है।

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वही जंगरयाण तोक के ग्रामीणों का कहना है कि गत वर्ष आई आपदा के दौरान भी इस क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ था। उस समय प्रशासन और शासन स्तर पर सुरक्षा दीवार तथा अन्य सुरक्षात्मक कार्य कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका आरोप है कि यदि पिछले वर्ष ही सुरक्षा दीवार और भूस्खलन रोकने के आवश्यक कार्य पूरे कर दिए गए होते, तो इस बार नुकसान की आशंका काफी कम हो सकती थी।ग्रामीणों के अनुसार लगातार दरकती जमीन और पहाड़ी से गिर रहे मलबे के कारण लोगों के सामने जान-माल का खतरा बना हुआ है। परिवारों को अपने घरों से दूर रहना पड़ रहा है और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल स्थायी सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।

ग्रामीण सुरेंद्र सिंह, अनूप सिंह, आशीष राणा श्रीपाल बिष्ट और द्वारिका सहित अन्य लोगों का कहना है कि घटना के बाद अभी तक शासन-प्रशासन का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द क्षेत्र का निरीक्षण कर प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध करानी चाहिए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए स्थायी सुरक्षा कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराने चाहिए।

वही आपदा से प्रभावित तालजामण ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल की आपदा में जंगरयाण तोक के सभी पैदल रास्ते, पेयजल लाइन और बिजली व्यवस्था भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। हैरानी की बात यह है कि एक साल बाद भी कई मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी हैं। इससे ग्रामीणों का जीवन लगातार मुश्किल बना हुआ है।

बड़ा सवाल…जब देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर प्रशासन से गुहार लगाए और एक साल तक भी सुनवाई न हो, तो क्या यह सैनिकों के सम्मान के दावों पर सवाल नहीं खड़ा करता? क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का यह दायित्व नहीं बनता कि देश की रक्षा करने वाले जवान के परिवार को भी सुरक्षित जीवन मिले? अब देखना होगा कि प्रशासन इस सैनिक परिवार की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह गुहार भी अनसुनी रह जाएगी।

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