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खुलासा: पूर्व कर्मचारी/पेंशनभोगी मोटी पेंशन लेते हुए वृद्धावस्था-विधवा पेंशन पर भी चुपके से डाल रहे डाका… कौन हैं ये लुटेरे?

दस्तक पहाड न्यूज देहरादून।। उत्तराखंड में एक बड़ा और शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां सरकारी पेंशन (सरकारी नौकरी से मिलने वाली पेंशन) लेने वाले कई पूर्व कर्मचारी/पेंशनभोगी वृद्धावस्था पेंशन और विधवा पेंशन का भी अवैध रूप से लाभ उठा रहे हैं। यह खुलासा महालेखाकार (CAG) उत्तराखंड के कार्यालय द्वारा डेटा एनालिटिक्स और क्रॉस-वेरिफिकेशन के दौरान हुआ है।

क्या है घोटाला – संख्या: 1363 से अधिक (कुछ रिपोर्टों में 1377) पूर्व सरकारी कर्मचारी/पेंशनभोगी ऐसे पाए गए हैं, जिनके आधार नंबर सरकारी पेंशन डेटाबेस और समाज कल्याण विभाग की सामाजिक पेंशन (वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन) सूची में समान मिले।

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क्या हो रहा है: ये लोग सरकारी खजाने से मोटी पेंशन लेते हुए साथ ही समाज कल्याण विभाग की योजनाओं से वृद्धावस्था पेंशन (बुजुर्गों के लिए) और विधवा पेंशन (विधवाओं के लिए) का लाभ भी ले रहे हैं, जो पूरी तरह अवैध है।

रिपोर्ट का स्रोत: महालेखाकार कार्यालय ने इसकी जानकारी संबंधित विभागों को भेजी है। यह डेटा क्रॉस-मैचिंग से सामने आया, जहां आधार नंबरों की मिलान से दोहरी पेंशन का मामला उजागर हुआ।

प्रभाव: राज्य में वृद्धावस्था पेंशन के लगभग 5.61 लाख और विधवा पेंशन के 2.19 लाख से अधिक लाभार्थी हैं (कुल 7.80 लाख+), और इनमें से कुछ जरूरतमंदों की जगह यह फर्जी/अवैध दावा कर रहे हैं, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है और असली पात्र लोगों को नुकसान हो रहा है।

पात्रता नियम (संक्षेप में) उत्तराखंड में वृद्धावस्था पेंशन और विधवा पेंशन समाज कल्याण विभाग द्वारा दी जाती हैं:

वृद्धावस्था पेंशन: 60 वर्ष या अधिक आयु, मासिक आय ₹4000 से कम या BPL कार्ड धारक।

विधवा पेंशन: 18 वर्ष से अधिक आयु की निराश्रित विधवा, आय ₹4000 से कम या BPL।

राशि: सामान्यतः ₹1500 प्रति माह (केंद्र + राज्य अंश मिलाकर)।

मुख्य शर्त: ये योजनाएं गरीब और जरूरतमंदों के लिए हैं, सरकारी पेंशनभोगियों के लिए नहीं, क्योंकि उनकी आय सीमा से अधिक होती है।यह मामला सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है, जिसे “डाका” कहना अतिशयोक्ति नहीं। CAG की रिपोर्ट के बाद विभागों को अब इन मामलों की जांच कर पेंशन रोकने और रिकवरी करने की कार्रवाई करनी होगी।

 

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