दस्तक पहाड न्यूज रुद्रप्रयाग।। देवभूमि उत्तराखंड के केदारनाथ धाम से जुड़ी अत्यंत पवित्र धार्मिक धरोहर धर्म दंड (रूप छड़) को लेकर हड़कंप मच गया। जब यह भंडार गृह में नहीं मिली तो मामला तूल पकड़ गया और सरकार ने जांच के आदेश दे दिए।
धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि मंदिर के धार्मिक प्रतीकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बदरी-केदार मंदिर समिति की है और पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी। बाद में जानकारी सामने आई कि केदारनाथ के मुख्य रावल भीमाशंकर लिंग महाराष्ट्र के एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान इस धर्म दंड को अपने साथ ले गए थे। बताया जा रहा है कि इसके लिए बीकेटीसी के सीईओ विजय थपलियाल ने 19 जनवरी 2026 को अनुमति दी थी। इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने सवाल उठाते हुए कहा कि चारधाम की परंपराओं में ऐसे धार्मिक प्रतीकों को निजी कार्यक्रमों में ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है।धार्मिक मान्यता के अनुसार ‘रूप छड़ी को बाबा केदार का ही स्वरूप माना जाता है और इसका दर्शन भी केदारनाथ के दर्शन के समान पुण्यदायी माना जाता है। फिलहाल बताया जा रहा है कि धर्म दंड सुरक्षित है और उत्तराखंड वापस आ चुका है, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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