दस्तक पहाड़ न्यूज अगस्त्यमुनि / रुद्रप्रयाग। उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग (UKPSC) द्वारा आयोजित प्रवक्ता (Lecturer) भर्ती परीक्षा एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। अभ्यर्थियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं, जिनमें परीक्षा तिथियों का टकराव, एडमिट कार्ड में बार-बार बदलाव और लंबी परीक्षा अवधि जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
आयोग ने 30 दिसंबर 2025 को 16 विषयों में प्रवक्ता भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, जिसके लिए 20 जनवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन लिए गए। लेकिन 3 फरवरी 2026 को जारी परीक्षा कैलेंडर में केवल 4 विषयों—भौतिक शास्त्र, नागरिक शास्त्र, हिन्दी और इतिहास—की परीक्षा तिथियां घोषित की गईं, जबकि बाकी 12 विषयों को लेकर कोई स्पष्टता नहीं दी गई। सबसे बड़ा विवाद भौतिक शास्त्र (9 मई) और नागरिक शास्त्र (10 मई) की परीक्षा तिथियों को लेकर सामने आया है। इन्हीं तिथियों पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UP-PGT) की परीक्षाएं भी निर्धारित हैं। ऐसे में दोनों राज्यों में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को मजबूरन एक परीक्षा छोड़नी पड़ रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि UP-PGT का कैलेंडर पहले जारी हो चुका था, इसके बावजूद UKPSC ने उन्हीं तिथियों पर परीक्षा रखकर उनके अवसर सीमित कर दिए। इस संबंध में अभ्यर्थियों ने शासन स्तर तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
एडमिट कार्ड में बदलाव से बढ़ी शंका : विवाद तब और गहरा गया जब 24 अप्रैल को जारी एडमिट कार्ड को दो दिन बाद ही निरस्त कर नए एडमिट कार्ड जारी किए गए। नए प्रवेश पत्रों में परीक्षा केंद्र और रोल नंबर तक बदल दिए गए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग द्वारा बिना स्पष्ट सूचना के इस तरह के बदलाव पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं।
लंबा परीक्षा शेड्यूल भी सवालों के घेरे में : आयोग द्वारा प्रवक्ता भर्ती परीक्षाओं को दिसंबर 2026 तक चरणबद्ध तरीके से आयोजित करने की योजना बनाई गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इससे कुछ को 3 महीने तो कुछ को 8–10 महीने तक तैयारी का समय मिल रहा है, जो समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है। जबकि उत्तर प्रदेश में इसी भर्ती को मात्र दो दिनों में संपन्न किया जा रहा है।
अभ्यर्थियों की मांग : अभ्यर्थियों ने आयोग से मांग की है कि भौतिक शास्त्र और नागरिक शास्त्र की परीक्षाओं को 9–10 मई की बजाय आगे की तिथियों में आयोजित किया जाए, ताकि वे दोनों राज्यों की परीक्षाओं में शामिल हो सकें। उनका कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और सभी को समान अवसर मिलेगा।अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।











