दस्तक पहाड़ न्यूज अगस्त्यमुनि।। राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अगस्त्यमुनि इन दिनों बाहरी वाहनों की अवैध पार्किंग से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल परिसर में मरीजों और एंबुलेंस के आवागमन तक में दिक्कतें पैदा हो रही हैं। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल परिसर धीरे-धीरे निजी वाहनों का पार्किंग स्थल बनता जा रहा है, जिससे आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
व्यापार मंडल अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह नेगी ने अस्पताल परिसर में बाहरी वाहनों की पार्किंग पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह को पार्किंग अड्डा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब एंबुलेंस तक को खड़ा होने की जगह नहीं मिल रही, तब यह सीधे-सीधे मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।उन्होंने कहा कि नगर पंचायत की पार्किंग सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद कुछ लोग पैसे बचाने के लिए अस्पताल परिसर में वाहन खड़े कर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन को इस मामले में तुरंत सख्त कदम उठाने चाहिए। त्रिभुवन सिंह नेगी ने मांग की कि अस्पताल परिसर में केवल एंबुलेंस, डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही प्रवेश दिया जाए तथा बाहरी वाहनों की पार्किंग पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डाॅ अक्षिता ममगाॅई ने बताया कि बाहरी वाहनों की पार्किंग से कई बार आपातकालीन सेवा वाहनों की आवा-जाही प्रभावित हो रही है। हमने आम नागरिकों के साथ-साथ इस समस्या को लेकर कई बार पुलिस प्रशासन को कहा गया, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही अस्पताल परिसर से बाहरी वाहनों को हटाया गया। स्थिति यह है कि कई बार एंबुलेंस को खड़ा करने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। वही पुलिस प्रशासन का कहना है अस्पताल परिसर में खड़े वाहनों का निरीक्षण कर चेतावनी दी जा रही है, शीघ्र नहीं हटाये गये तौर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल परिसर में केवल एंबुलेंस और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही अनुमति दी जाए। साथ ही बाहरी वाहनों पर तत्काल रोक लगाकर सख्त कार्रवाई की जाए। सबसे हैरानी की बात यह है कि अस्पताल की सुरक्षा दीवार के दूसरी ओर नगर पंचायत की पार्किंग सुविधा उपलब्ध है, लेकिन कुछ वाहन मालिक पैसे बचाने के चक्कर में अस्पताल परिसर में ही गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।लोगों का यह भी कहना है कि अस्पताल प्रशासन का रवैया भी इस मामले में ढुलमुल नजर आ रहा है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी आपात स्थिति में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।











