दस्तक पहाड़ न्यूज फलासी / चोपता।। रुद्रप्रयाग जनपद के फलासी गांव में बीते छह माह से चल रही माँ चण्डिका देवरा विन्यास यात्रा एवं नौ दिवसीय महायज्ञ शुक्रवार को अत्यंत भावुक वातावरण में पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हो गया। माँ भगवती की विदाई के इस अलौकिक और भाव विह्वल करने वाले दृश्य को देखने के लिए पंचकोटी क्षेत्र सहित दूर-दराज़ के गांवों से हजारों श्रद्धालु फलासी गांव पहुंचे। गांव के खेत-खलिहान श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे और हर कोई अपनी “ध्याण” माँ चण्डिका की अंतिम झलक पाने को आतुर दिखाई दिया।
विदाई के इन क्षणों ने हर श्रद्धालु को भीतर तक भावुक कर दिया। लोक परंपराओं और देव संस्कृति से समृद्ध पहाड़ में देवी-देवताओं को केवल आराध्य नहीं, बल्कि रिश्तों में बांधकर देखा जाता है। कल नागपुर क्षेत्र में माँ चण्डिका को विवाहित बेटी अर्थात “ध्याण” के रूप में माना जाता है। मान्यता है कि माँ चण्डिका कुछ वर्षों के अंतराल के बाद अपने मायके आती हैं, अपने मैतीजनों और क्षेत्रवासियों का कुशलक्षेम पूछती हैं, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं और फिर भावुक मन से पुनः अपने कैलाश धाम लौट जाती हैं। यही लोक आस्था देवरा विन्यास परंपरा के रूप में पीढ़ियों से जीवित है।
शुक्रवार प्रातः पंचांग पूजन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति सम्पन्न हुई। इसके बाद माँ चण्डिका की ब्रह्म शक्ति को विधिवत विदाई दी गई। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि हर आंख नम हो उठी। विदाई से पूर्व ब्रह्मगुरु द्वारा ब्रह्मशक्ति ऐरवालो से ले ली जाती है।
जिसके पश्चात माँ भगवती के वाहक, जिन्हें स्थानीय भाषा में “ऐरवाले” कहा जाता है, को आज बणातोली के समीप घास पूस से बनी एक झोपड़ी के पीछे ले जाया गया तथा माँ की ब्रह्म शक्ति को उसके सामने खड़ा कर झोपड़ी में अग्नि प्रज्वलित की गई। इसके बाद माँ की ब्रह्म शक्ति को जलवास दे दिया जाता है। जैसे ही यह दृश्य सामने आया, श्रद्धालुओं की आंखों से अश्रुधारा बह निकली और पूरा वातावरण “जय माँ चण्डिका” के उद्घोष से गूंज उठा। इसके साथ ही ऐरवाले भी पुनः अपने लौकिक संसार की ओर लौट गए। बीते छह माह तक उन्होंने कठोर नियमों, संयम और तपस्या का पालन करते हुए माँ चण्डिका की ब्रह्म शक्ति के साथ सम्पूर्ण देवरा यात्रा को सम्पन्न किया। सांसारिक सुखों से दूर रहकर माँ की सेवा और साधना में लीन रहने वाले ऐरवालों के लिए यह अंतिम दिवस अत्यंत भावुक रहा। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसका हृदय अधीर हो उठा।इसके साथ ही नौ दिनों तक माँ चण्डिका के मैती ( मायके) जाखणी ग्रामवासियों द्वारा बनाए गए शीरा-बौट को भक्तों को प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया। इसके पश्चात तुंगनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी श्री त्रिलोचन भट्ट ने मां चण्डिका के काष्ठ विग्रह “फर्श” को भद्र मंडप से लाकर पुन: मुख्य मंदिर में स्थापित कर दिया।
माँ चण्डिका की ब्रह्म शक्ति की विदाई के पश्चात ब्रह्मकोटी बेंजी एवं मायकोटि, क्यूड़ी गांव के ब्राह्मणों द्वारा यज्ञपति एवं समस्त पंचकोटी गांव फलासी, छतोरा, गडिल, मलाऊ, कुण्डा-दाणकोट, जाखणी, क्यूड़ी-काण्डा, कोल्लू, भनू, तड़ाग, बडोनी, उर्लीखो, खालि, भट्टवाड़ी सहित 16 गांवों के ग्रामीणों को श्रीसम्वाद सुफल का आशीर्वाद प्रदान किया गया। पंचकोटी समाज ने भी अपने ब्राह्मणों का सम्मान कर उन्हें भावभीनी विदाई दी।
इस प्रकार छह माह से चल रही माँ चण्डिका देवरा विन्यास यात्रा पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और सफल आयोजन के साथ सम्पन्न हो गई। इस संपूर्ण आयोजन में श्री तुंगेश्वर मंदिर समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के सदस्यों ने तन-मन-धन से इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में अपना पूर्ण समर्पण दिया। पंचकोटी क्षेत्र के 16 गांवों के लोगों ने भी एकजुट होकर यात्रा और महायज्ञ को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान निभाया। फलासी गांव में सम्पन्न हुई यह देव परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पहाड़ की लोक संस्कृति, आस्था, रिश्तों, मैती भाव और सामूहिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई।
माँ चण्डिका के ब्रह्मगुरु पंडित जगदम्बा प्रसाद बेंजवाल ने कहा कि माँ चण्डिका बन्याथ की पावन छत्रछाया में आयोजित इस दिव्य आयोजन के सफल संपन्न होने पर, मैं श्री तुंगेश्वर मंदिर समिति, पंचकोटि ग्रामों के समस्त नागरिकों, माँ चण्डिका के ऐरवालों एवं देवरा यात्रियों के प्रति हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करता हूँ। आप सभी के सहयोग, समर्पण और श्रद्धा ने इस महायज्ञ को भव्यता और दिव्यता प्रदान की।
बन्याथ के आचार्य पंडित चंद्र मोहन वशिष्ठ ने कहा कि आज पूर्ण विधि-विधान के साथ आयुत महायज्ञ का समापन हो गया। समस्त भक्तजनों के सहयोग से यह कार्य निर्विघ्न संपन्न हुआ। माँ चण्डिका से विनम्र प्रार्थना है कि कि वे पंचकोटि ग्रामों के समस्त परिवारों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें और सभी को सुख, समृद्धि, कुशलता एवं उत्तम आरोग्यता का आशीर्वाद प्रदान करें।
देवरा बन्याथ के समापन पर मन्दिर समिति अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह बर्त्वाल ने समस्त पदाधिकारियों और पंचकोटि ग्राम वासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का आयोजन माँ चण्डिका की सुखद स्मृति के साथ सभी हृदयों को तृप्त कर गया है।
इस अवसर पर आशुतोष नेगी, संजीव बर्त्वाल, पूर्ण सिंह खत्री, कल्याण सिंह नेगी, दलवीर सिंह राणा , मदन सिंह नेगी , यशवंत सिंह नेगी, रणजीत सिंह, सते सिंह नेगी, सीमांत अनुश्रवण बोर्ड के उपाध्यक्ष चण्डी प्रसाद भट्ट, जिला पंचायत सदस्य चोपता संपन्न नेगी सहित पंचकोटी के ग्रामीणो और बड़ी संख्या में भक्त, बाबा डमरू धारी सेवा मंडली के सदस्य उपस्थित रहे।



माँ चण्डिका की विदाई में








