दस्तक पहाड न्यूज देहरादून। उत्तराखंड में भूकंप जैसी आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अब हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे प्रदेश में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के सायरन का टेस्ट किया जाएगा। इस दौरान बजने वाला सायरन किसी वास्तविक भूकंप की चेतावनी नहीं होगा, बल्कि यह पूर्व निर्धारित सिस्टम टेस्ट होगा।इस पहल का उद्देश्य भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली में लगे सेंसर और सायरन की तकनीकी जांच करने के साथ-साथ आम लोगों को सायरन की आवाज से परिचित कराना है, ताकि वास्तविक भूकंप के समय चेतावनी मिलने पर लोग घबराने के बजाय तत्काल सुरक्षित कदम उठा सकें।
भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है उत्तराखंड
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आपदा प्रबंधन विभाग को इस व्यवस्था को नियमित रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के साथ बैठक कर भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की समीक्षा की।मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य है और प्रदेश का बड़ा हिस्सा भूकंपीय जोन चार और पांच में आता है। ऐसे में भूकंप को लेकर जागरूकता, पूर्व तैयारी और समय पर चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सिस्टम में लगे सेंसर और सायरन की नियमित जांच के साथ आवश्यकता के अनुसार नए सेंसर और सायरन लगाने के निर्देश भी दिए।
169 सेंसर और 112 सायरन से निगरानी
वर्तमान में उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन लगाए गए हैं। इन सेंसर के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। भूकंपीय घटना की स्थिति में सिस्टम संबंधित क्षेत्रों तक चेतावनी पहुंचाने का प्रयास करता है।यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से इस व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सेंसर लगाने का प्रस्ताव भी चल रहा है। इससे प्रदेश में भूकंप की निगरानी और पूर्व चेतावनी देने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
6 अक्टूबर के भूकंप में सामने आई सिस्टम की उपयोगिता : 6 अक्टूबर 2026 की रात करीब 10:23 बजे चमोली जिले के थराली क्षेत्र के पास 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। भूकंप की गहराई करीब 13 किलोमीटर बताई गई। इस दौरान आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली ने काम किया और भूकंपीय तरंगों के लोगों तक पहुंचने से पहले चेतावनी देने में मदद की। भूदेव मोबाइल ऐप और लगाए गए सायरन के माध्यम से लोगों को अलर्ट किया गया।आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि भूकंप जैसी अचानक आने वाली आपदा में कुछ सेकंड की पूर्व चेतावनी भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। इन कुछ सेकंड में लोग सुरक्षित स्थान पर जा सकते हैं, गैस और बिजली के उपकरण बंद कर सकते हैं तथा जरूरी सावधानी बरत सकते हैं।
असली खतरे के समय सायरन पहचान सकेंगे लोग
हर महीने होने वाली सायरन टेस्टिंग का एक प्रमुख उद्देश्य लोगों को इसकी आवाज से परिचित कराना भी है। आम तौर पर लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि वास्तविक भूकंप की पूर्व चेतावनी मिलने पर सायरन कैसा सुनाई देगा। ऐसे में अचानक सायरन बजने पर भ्रम और घबराहट की स्थिति पैदा हो सकती है। नियमित टेस्टिंग से लोग सायरन की आवाज पहचान सकेंगे और वास्तविक खतरे के समय तेजी से प्रतिक्रिया दे पाएंगे। विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, सतर्क और आपदा के लिए तैयार करना है।
मोबाइल पर भी मिलेगा टेस्ट अलर्ट
हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे केवल सायरन ही नहीं बजेगा, बल्कि भूदेव मोबाइल ऐप पर भी टेस्ट अलर्ट भेजा जाएगा। मोबाइल पर वाइब्रेशन और बीप की आवाज के जरिए चेतावनी संकेत मिलेगा। यूएसडीएमए ने लोगों से भूदेव और सचेत ऐप का अपडेटेड वर्जन मोबाइल में रखने तथा दोनों ऐप को आवश्यक लोकेशन अनुमति देने की अपील की है, ताकि संबंधित क्षेत्र के लिए जारी चेतावनी समय पर मोबाइल तक पहुंच सके।
9 तारीख को सायरन बजे तो न घबराएं
यूएसडीएमए ने स्पष्ट किया है कि हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन सुनाई देने पर घबराने की जरूरत नहीं है। यह पहले से निर्धारित सिस्टम टेस्ट होगा।लोगों से अपील की गई है कि वे अपने परिवार के सदस्यों, बच्चों और बुजुर्गों को भी इस व्यवस्था की जानकारी दें। साथ ही भूकंप के दौरान सुरक्षित रहने के उपायों की जानकारी लें और समय-समय पर आयोजित होने वाली मॉक ड्रिल में सक्रिय भागीदारी करें।


उत्तराखंड में हर महीने 9








