दस्तक पहाड न्यूज बदरीनाथ। विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए 16 नवंबर 2026 को रात्रि 9:37 बजे विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ बंद किए जाएंगे। विजयदशमी के पावन पर्व पर मंदिर परिसर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कपाट बंद होने की तिथि और समय की विधिवत घोषणा की गई।
कपाट बंद होने से पूर्व बदरीनाथ धाम में पंच पूजाओं का विशेष आयोजन होगा। इन पूजाओं के साथ ही धाम में देवताओं के आगमन की धार्मिक मान्यता है। इसके बाद शीतकाल के छह माह तक भगवान बदरीविशाल की पूजा-अर्चना देवताओं द्वारा किए जाने की परंपरा है, जबकि शेष छह माह मानवों द्वारा पूजा की जाती है।
पंच पूजाओं का कार्यक्रम
- 12 नवंबर: प्रथम पूजा के तहत भगवान गणेश की भोग पूजा होगी और संध्या में गणेश मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे।
- 13 नवंबर: आदि केदारेश्वर मंदिर एवं शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे।
- 14 नवंबर: खड्ग-पुस्तक पूजन के साथ वेद ऋचाओं का वाचन संपन्न किया जाएगा।
- 15 नवंबर: मां लक्ष्मी जी का आह्वान किया जाएगा, ताकि कपाट बंद होने से पूर्व वे भगवान बदरीविशाल के साथ विराजमान हों।
- 16 नवंबर: पंचम एवं अंतिम पूजा के बाद रात्रि 9:37 बजे मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भगवान बदरीविशाल के कपाट शीतकालीन देवपूजा के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
कपाट बंद होने के बाद भगवान बदरीविशाल की उत्सव डोली एवं अन्य धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतकालीन प्रवास की प्रक्रिया शुरू होगी। छह माह के शीतकालीन प्रवास के दौरान श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल के दर्शन उनके शीतकालीन पूजा स्थल पर कर सकेंगे।










