दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि।। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) की राष्ट्रीय टीम की घोषणा के बाद उत्तराखंड के राजनीतिक और युवा संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय टीम में उत्तराखंड से किसी युवा नेता को जगह नहीं मिलने पर अब पार्टी के भीतर और बाहर चर्चा तेज हो गई है। उत्तराखंड में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और चुनावी गतिविधियों में युवा कार्यकर्ताओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है। चुनाव हो या पार्टी के कार्यक्रम, रैलियां हों या जनसंपर्क अभियान—युवा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सक्रिय नजर आते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर की युवा टीम में प्रदेश को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
आखिर उत्तराखंड के युवा नेतृत्व को जगह क्यों नहीं मिली? : सवाल यह नहीं है कि किसी एक नेता को राष्ट्रीय पद मिला या नहीं मिला। बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड के युवा नेतृत्व को राष्ट्रीय संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल रहा है? भाजपा से जुड़े बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हैं। बूथ स्तर से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही है। इसके बावजूद राष्ट्रीय टीम में प्रदेश से एक भी युवा चेहरा शामिल न होना निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बन गया है।
2027 के चुनाव से पहले बढ़ी चिंता : उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा के लिए युवा वोटर और युवा संगठन दोनों ही महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा भाजपा और युवा मोर्चा से जुड़े हैं। ऐसे समय में राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड को प्रतिनिधित्व नहीं मिलना प्रदेश के युवा कार्यकर्ताओं की उम्मीदों और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर सवाल खड़े करता है। क्या उत्तराखंड में प्रतिभाशाली युवा नेताओं की कमी है? या फिर प्रदेश के युवा नेतृत्व की क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जा सका?
युवा सिर्फ भीड़ का हिस्सा नहीं, नेतृत्व की ताकत भी हैं
राजनीतिक दलों में युवाओं से अक्सर चुनावी मैदान में सबसे आगे रहने की अपेक्षा की जाती है। लेकिन जब संगठन में निर्णय लेने और नेतृत्व की जिम्मेदारी देने की बात आती है, तो क्या उन्हें समान अवसर मिल रहा है—यह सवाल अब उठना स्वाभाविक है। उत्तराखंड के युवा कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देवभूमि की राजनीति में आने वाले समय में युवा नेतृत्व की भूमिका और बढ़ने वाली है। क्या भाजपा के केंद्रीय संगठन को उत्तराखंड के युवा नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिनिधित्व देना चाहिए?यह सवाल अब राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ भाजपा के युवा कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है।


देवभूमि के युवा सिर्फ झंडे








