दस्तक पहाड़ न्यूज देहरादून। प्रदेश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच वन मंत्री के एक बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है। हाल ही में दिए गए अपने बयान में मंत्री ने कहा कि “अगर आप खुद गुलदार के मुंह की ओर जाएंगे तो शिकार बनना तय है।” इस टिप्पणी के सामने आने के बाद लोगों के बीच इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मंत्री का आशय लोगों को सतर्क करना और जंगलों में अनावश्यक जाने से बचने की सलाह देना था, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। वहीं, दूसरी ओर कई लोगों ने इस बयान को संवेदनहीन बताते हुए कहा कि इससे पीड़ित परिवारों की पीड़ा को नजरअंदाज किया जा रहा है।
प्रदेश के कई पहाड़ी इलाकों में हाल के समय में गुलदार (तेंदुआ) के हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने में डरने लगे हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि गुलदार संरक्षण के नाम पर मानवों की सुरक्षा को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि पहाड़ों में लगातार पलायन के चलते मानव आबादी कम हो रही है, जबकि गुलदारों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में गांवों में रह रहे लोगों के सामने जीवन और सुरक्षा का बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव के पीछे जंगलों का सिमटना, प्राकृतिक आवास में बदलाव और भोजन की कमी जैसे कारण जिम्मेदार हैं। इस स्थिति में केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि ठोस और संतुलित नीति की आवश्यकता है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।फिलहाल, मंत्री के इस बयान को लेकर बहस तेज हो गई है कि इसे चेतावनी के रूप में देखा जाए या फिर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश के तौर पर। वहीं, आम जनता सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर स्पष्ट रणनीति और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।










