दस्तक पहाड़ न्यूज पोखरी। पहाड़ में इंसान और जंगली जानवरों के बीच बढ़ता संघर्ष अब ग्रामीणों की जिंदगी पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। जंगल से सटे गांवों में रोजमर्रा के काम के लिए निकलने वाले ग्रामीण कब जंगली जानवरों का शिकार हो जाएं, यह कहना मुश्किल है। चमोली जिले के पोखरी विकासखंड के ग्राम पंचायत नैल के सिदेली तोक में शुक्रवार को हुई घटना ने एक बार फिर पहाड़ में ग्रामीणों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गांव के समीप घास काट रही दो महिलाओं के सामने अचानक भालू आ गया। बताया जा रहा है कि भालू ने महिलाओं का पीछा किया, जिससे दोनों घबरा गईं। जान बचाने के लिए भागने के दौरान दोनों महिलाएं चट्टान से फिसलकर करीब 300 मीटर गहरी खाई में जा गिरीं।
हादसे में दोनों महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और दोनों को खाई से निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखरी पहुंचाया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया जा रहा है।
एक महिला की मौत, दूसरी गंभीर घायल : जानकारी के अनुसार सुबह करीब 8:30 बजे भालू ने महिलाओं पर हमला किया। हमले के दौरान एक महिला चट्टान से नीचे गिर गई। घटना में विमला देवी पत्नी चंद्रशेखर नेगी(55 वर्ष) की मौके पर मौत हो गई, जबकि लक्ष्मी देवी पत्नी गजेंद्र नेगी (42 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हुई हैं। डॉ. शनि चौधरी ने बताया कि भालू के हमले से एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि गंभीर रूप से घायल महिला को प्राथमिक उपचार के बाद बेस अस्पताल श्रीनगर रेफर किया गया है। मृतका के शव के पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सकों की टीम पोखरी पहुंच रही है। वहीं, घायल महिला को श्रीनगर ले जाने के लिए एंबुलेंस से भेजा गया।घटना की सूचना मिलते ही मौके पर परिजन और स्थानीय लोग पहुंचे। तहसीलदार रामकिशोर ध्यानी तथा वन विभाग के दारोगा मोहन बर्त्वाल भी मौके पर मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार डीएफओ रजत सुमन और एसडीओ मोहन सिंह भी पोखरी अस्पताल पहुंच रहे हैं। वन विभाग की एक टीम घायल महिला के साथ श्रीनगर अस्पताल गई है, जहां घायल के उपचार एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग किया जाएगा।घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में भालू की सक्रियता को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
पहाड़ में आखिर कौन सुरक्षित?
यह घटना सिर्फ दो महिलाओं के घायल होने की कहानी नहीं, बल्कि पहाड़ के गांवों में रहने वाले लोगों की बढ़ती असुरक्षा की तस्वीर है। खेती, घास और लकड़ी के लिए जंगल और जंगल के आसपास जाने वाली महिलाएं अक्सर जंगली जानवरों के खतरे के बीच काम करने को मजबूर हैं। गुलदार, भालू और अन्य वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन स्थायी सुरक्षा के उपायों को लेकर सवाल बने हुए हैं। खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। सिदेली तोक की घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, भालू की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि जंगली जानवर गांव तक क्यों पहुंच रहे हैं, सवाल यह भी है कि पहाड़ के जंगलों और गांवों के बीच रहने वाला इंसान आखिर कितना सुरक्षित है?
अगर चाहें तो मैं इसे दस्तक पहाड़ न्यूज़ की आक्रामक/सवाल उठाने वाली शैली में और ज्यादा धारदार बनाकर भी लिख सकता हूँ।


पहाड़ में कौन सुरक्षित? जंगली









