दस्तक पहाड़ न्यूज चमोली। हिमालय की लोक आस्था, परंपरा और संस्कृति से जुड़ी ऐतिहासिक श्री नंदा देवी बड़ी जात को लेकर चमोली जिले में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। सिद्धपीठ कुरुड़ में 3 सितंबर 2026 से तीन दिवसीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन मेले का आयोजन होगा, जबकि 5 सितंबर को कुरुड़ गांव से मां नंदा देवी की बड़ी जात शुरू होने की तैयारी है। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।बड़ी जात की अगुवाई करने वाला चौसिंगा खाड़ू भी तैयार हो चुका है। नंदा देवी की यात्रा परंपरा में चार सींगों वाले इस मेढ़े को अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चौसिंगा खाड़ू मां नंदा की यात्रा में सबसे आगे चलता है और इसे देवी के दूत के रूप में देखा जाता है। इसके तैयार होने के साथ ही यात्रा को लेकर क्षेत्र में उत्साह और बढ़ गया है।
5 सितंबर को कुरुड़ से शुरू होगी बड़ी जात : बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) हरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि परगना बधाण, दशोली और बंड क्षेत्र के साथ ही कुरुड़ गांव के सभी गौड़ पुजारियों, मंदिर समितियों के अध्यक्षों एवं पुजारियों के सहयोग से 5 सितंबर को कुरुड़ गांव से मां नंदा की बड़ी जात प्रारंभ होगी। उन्होंने सभी नंदा भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में यात्रा में शामिल होने की अपील की है।आयोजन समिति के अनुसार यात्रा का अंतिम पड़ाव हिमालय में स्थित होमकुंड माना जाता है। कुरुड़ से होमकुंड तक की यह कठिन हिमालयी यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था, तपस्या और सामूहिक सहभागिता का अनूठा अनुभव होती है।

यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस ने तैयार किया प्लान : सांस्कृतिक एवं पर्यटन मेले और नंदा जात के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए चमोली पुलिस ने यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष यातायात प्लान तैयार किया है। पुलिस ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।
आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम : मां नंदा देवी को उत्तराखंड हिमालय की अधिष्ठात्री देवी और लोक आस्था की प्रमुख देवी माना जाता है। नंदा देवी की बड़ी जात केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि गढ़वाल की लोक संस्कृति, परंपराओं, गीत-संगीत, देवी-देवताओं की मान्यताओं और सामुदायिक सहभागिता का भी बड़ा उत्सव है।लोक मान्यता के अनुसार मां नंदा अपने मायके से ससुराल यानी कैलाश की ओर प्रस्थान करती हैं। इसी भाव के साथ श्रद्धालु मां नंदा की डोली के साथ दुर्गम हिमालयी मार्गों पर आगे बढ़ते हैं।
2026 में बड़ी जात को लेकर कुरुड़ समिति कायम
नंदा देवी यात्रा के आयोजन वर्ष को लेकर अलग-अलग समितियों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। कुरुड़ आयोजन समिति वर्ष 2026 में बड़ी जात आयोजित करने के निर्णय पर कायम है, जबकि नंदा राजजात समिति की ओर से राजजात का आयोजन 2027 में किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में कुरुड़ पक्ष अपने आयोजन को लगातार ‘नंदा देवी बड़ी जात’ के नाम से संबोधित कर रहा है।फिलहाल सिद्धपीठ कुरुड़ में मेले और बड़ी जात को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। चौसिंगा खाड़ू के तैयार होने के बाद अब श्रद्धालुओं की निगाहें 5 सितंबर 2026 को होने वाले मां नंदा के पवित्र प्रस्थान पर टिकी हैं।


सिद्धपीठ कुरुड़ में 5 सितंबर









