दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि। सेवा संकल्प अभियान के तहत मंगलवार को डॉ. अनसूया प्रसाद बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अगस्त्यमुनि में ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर निबंध, भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा, विचारों और कल्पनाओं के माध्यम से भारत के उज्ज्वल भविष्य की परिकल्पना प्रस्तुत की। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया।महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कैलाश चंद्र दुदपुड़ी ने अतिथि को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर मिलता है। साथ ही उनमें रचनात्मकता, आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूकता विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक एवं राष्ट्रीय विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं की सोच, शिक्षा, मेहनत और राष्ट्र के प्रति समर्पण पर निर्भर करता है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देने के साथ ही उनमें रचनात्मकता, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य निर्धारित कर देश और समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत सदस्य जयवर्धन काण्डपाल ने माननीय प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के निरंतर समाज सेवा के अनुभव और विकसित भारत की परिकल्पना पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि ‘मेरे सपनों का भारत’ एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना है, जहां शिक्षा, समान अवसर, सामाजिक समरसता और विकास को प्राथमिकता मिले। उन्होंने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच के साथ अपने सपनों को साकार करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के मुख्य शास्ता डॉ. मुक्ता डंगवाल, छात्रसंघ अध्यक्ष लक्की राणा, महासचिव लोकेश भट्ट सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विवेकानंद भट्ट ने किया।आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। अतिथियों एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।










