🔴 “तीन साल से बहादुर बच्चों का इंतज़ार — राज्य वीरता पुरस्कार फाइलों में क्यों बंद?”
🔴 “जान बचाने वाले बच्चों को सम्मान कब, उत्तराखंड में वीरता पुरस्कार प्रक्रिया ठप”
🔴 “राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन, लेकिन राज्य में उपेक्षा — वीरता पुरस्कार क्यों रुके?”
दस्तक पहाड़ न्यूज देहरादून। उत्तराखंड में बहादुर बच्चों की कोई कमी नहीं है। राज्य के कई बच्चों ने बीते वर्षों में जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाई है और राष्ट्रीय स्तर पर वीरता पुरस्कार भी हासिल किए हैं। बावजूद इसके, पिछले लगभग तीन वर्षों से राज्य स्तर पर बच्चों को वीरता पुरस्कार नहीं मिल पाया है।
जानकारी के अनुसार, राज्य बाल कल्याण परिषद की ओर से वर्ष 2021 के बाद से किसी भी बच्चे को राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार नहीं दिया गया है। जबकि इस अवधि में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें बच्चों ने साहस, सूझबूझ और मानवता की मिसाल पेश की। राज्य बाल कल्याण परिषद के अधिकारियों का कहना है कि इन बच्चों को राज्य स्तर पर सम्मानित किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है। इसके लिए परिषद की आगामी बैठक में प्रस्ताव लाए जाने की संभावना है। यदि प्रस्ताव पास होता है तो लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे बहादुर बच्चों को उनका हक़ मिल सकता है। गौरतलब है कि उत्तराखंड के अब तक 15 से अधिक बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार मिल चुका है। इनमें टिहरी, देहरादून, अल्मोड़ा, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और चंपावत जैसे जिलों के बच्चे शामिल हैं, जिन्होंने आग, पानी, दुर्घटनाओं और अन्य आपात स्थितियों में अदम्य साहस दिखाया। परिषद से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पहले इन पुरस्कारों के लिए नियमित रूप से प्रस्ताव भेजे जाते थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह प्रक्रिया ठप पड़ी है। वर्ष 2024 और 2025 में भी इस संबंध में कोई आवेदन या प्रस्ताव राज्य की ओर से आगे नहीं बढ़ाया गया। अब उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य बाल कल्याण परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार होगा और बहादुर बच्चों को राज्य स्तर पर वीरता पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।










