दस्तक पहाड न्यूज । रुद्रप्रयाग।। पहाड़ों में पहले से ही सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय से एक साथ छह विशेषज्ञ चिकित्सकों के तबादले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्थानांतरित चिकित्सकों के स्थान पर अब तक नए विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं की गई है। ऐसे में आम लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या पहाड़ की स्वास्थ्य सुविधाएं भगवान भरोसे छोड़ दी गई हैं?
जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय से शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन), ईएनटी विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित कुल छह विशेषज्ञ चिकित्सकों का स्थानांतरण किया गया है। इन पदों के रिक्त होने से अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ सकता है जिन्हें तत्काल विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होती है।रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय केवल रुद्रप्रयाग जनपद ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती चमोली जनपद के हजारों लोगों के लिए भी प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से नवजात शिशुओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना में घायल मरीजों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को अब इलाज के लिए श्रीनगर, ऋषिकेश और देहरादून जैसे शहरों का रुख करना पड़ सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में लंबी दूरी, खराब सड़कें और सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच यह स्थिति मरीजों और उनके परिजनों के लिए अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक बोझ साबित हो सकती है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासनिक कारणों से तबादले आवश्यक थे तो उनके स्थान पर नए विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्काल तैनाती भी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के एक साथ कई विशेषज्ञ डॉक्टरों का स्थानांतरण स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं का यह मुद्दा जनचर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि सरकार पर्वतीय जिलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लगातार बनी हुई है।रुद्रप्रयाग और चमोली की जनता ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जिला चिकित्सालय के सभी रिक्त विशेषज्ञ पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और उन्हें बेहतर इलाज के लिए दूसरे जनपदों की ओर पलायन न करना पड़े। लोगों का कहना है कि पहाड़ के लोगों को भी मैदानी क्षेत्रों की तरह बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।


क्या सरकार की प्राथमिकता में









