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“बेटी की अंतिम इच्छा ने बदल दी ज़िंदगी: विदेश छोड़ गाँव लौटे जयेंद्र राम जगवाण, 35 लाख की ‘आयशा वाहिनी’ एंबुलेंस से शुरू किया सेवा मिशन”

35 लाख की ‘आयशा वाहिनी’ एंबुलेंस क्षेत्र को समर्पित, दिवंगत बेटी की अंतिम इच्छा को बनाया जनसेवा का मिशन


दीपक बेंजवाल / दस्तक पहाड़ न्यूज।। जखोली विकासखंड की गोर्ती ग्राम पंचायत के निवासी एवं कारोबारी जयेंद्र राम जगवाण ने अपनी दिवंगत 19 वर्षीय पुत्री आयशा की स्मृति में लगभग 35 लाख रुपये की अत्याधुनिक “आयशा वाहिनी” एंबुलेंस क्षेत्रवासियों को समर्पित कर मानवता और जनसेवा की अनूठी मिसाल पेश की है।

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जयेंद्र राम जगवाण का वर्षों तक विदेश में सफल कारोबार रहा। उनका जन्म मुंबई में हुआ और वहीं से उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत की। हालांकि, विदेश और महानगरों में रहने के बावजूद उनका मन हमेशा अपनी मातृभूमि गढ़वाल और अपने पैतृक गाँव से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने बच्चों को भी बचपन से ही गढ़वाल की संस्कृति, गाँव और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सीख दी। यही कारण था कि उनकी बेटी आयशा भी अपने गाँव और क्षेत्र के लिए कुछ सार्थक करने का सपना देखती थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। महज 19 वर्ष की आयु में आयशा का असमय निधन हो गया। इस दुखद घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। बेटी की अंतिम इच्छा को अपना संकल्प बनाते हुए जयेंद्र राम जगवाण विदेश का कारोबार छोड़ भारत लौट आए। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे अपने बेटों को भी वापस भारत बुलाया, ताकि पूरा परिवार मिलकर आयशा के सपनों को साकार कर सके।पहाड़ में समय पर स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीजों के लिए एंबुलेंस की कमी को देखते हुए उन्होंने “आयशा वाहिनी” के नाम से पहली अत्याधुनिक एंबुलेंस सेवा शुरू की, जिसे अब क्षेत्रवासियों को समर्पित कर दिया गया है। यह एंबुलेंस आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

दस्तक पहाड़ से विशेष बातचीत में जयेंद्र राम जगवाण ने कहा, “मेरी सोच बहुत बड़ी है और शुरुआत छोटी है। यह केवल एक एंबुलेंस नहीं, बल्कि बेटी की अंतिम इच्छा को पूरा करने की दिशा में पहला कदम है। मैं इस सेवा मिशन का लगातार विस्तार करूंगा, ताकि पहाड़ के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।”

उन्होंने बताया कि भविष्य में वे इस सेवा अभियान को और आगे बढ़ाना चाहते हैं। उनकी योजना क्षेत्र में और एंबुलेंस सेवाएं शुरू करने के साथ-साथ स्कूली बच्चों की सुविधा के लिए स्कूल बस सेवा उपलब्ध कराने की भी है, ताकि दूर-दराज़ के गाँवों के बच्चों को शिक्षा के लिए बेहतर परिवहन मिल सके।

जयेंद्र राम जगवाण की यह पहल केवल एक सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि अपनी बेटी की याद को जनकल्याण से जोड़ने का भावनात्मक और प्रेरणादायक प्रयास है। क्षेत्र के लोग इसे मानवता, मातृभूमि प्रेम और समाज के प्रति जिम्मेदारी का अद्भुत उदाहरण मान रहे हैं।

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