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पंद्रह वर्षों बाद कुलपुरोहितों के गाँव बेंजी पहुँची भगवान अगस्त्य मुनिमहाराज की देव डोली, वेद मंत्रों से हुआ भव्य स्वागत

दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि।। मंदाकिनी घाटी के आराध्य भगवान अगस्त्य मुनिमहाराज की पावन देव डोली पंद्रह वर्ष बाद अपने पारंपरिक भ्रमण पर निकलते हुए आज बुधवार को कुलपुरोहितों के गाँव बेंजी पहुँची। देव डोली के आगमन से पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला।बेंजी पहुँचने पर ब्रह्मकोटी बेंजी की ओर से भगवान मुनिमहाराज का वेद ऋचाओं और स्तुति मंत्रों के साथ भव्य स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने श्री तुंगनाथ बिथरा चौक में सामूहिक अर्घ्य अर्पित कर देवता का पारंपरिक रीति-रिवाजों से अभिनंदन किया। वातावरण जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा। देवता की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी निभाते हुए आचार्य भूपेंद्र बेंजवाल, सुनील बेंजवाल, मठाधीश योगेश बेंजवाल, सुशील बेंजवाल और वासु बेंजवाल ने विधिवत अर्घ्य और भोग पूजा सम्पन्न कराई। बेंजी गाँव के बेंजवाल ब्राह्मण भगवान अगस्त्य मुनिमहाराज के कुलपुरोहित माने जाते हैं और वे प्राचीन काल से भगवान अगस्त्य की पूजा परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं। मान्यता है कि भगवान अगस्त्य का प्राचीन ‘अगस्त्य कवच’ आज भी इन्हीं ब्राह्मणों के पास सुरक्षित है, जो इस परंपरा की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है।

देव डोली के स्वागत अवसर पर आचार्य जगदम्बा प्रसाद बेंजवाल, कैलाश बेंजवाल, सुशील बेंजवाल, राकेश बेंजवाल, शिवप्रसाद बेंजवाल, नीलकंठ बेंजवाल, परमेशानंद बेंजवाल, पूर्व प्रधान मनोज बेंजवाल, कात्यायनी बेंजवाल, बृजमोहन बेंजवाल, अरुण बेंजवाल, आशुतोष बेंजवाल, जयदत्त बेंजवाल, धर्मानंद बेंजवाल, देवी प्रसाद, प्रियधर बेंजवाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। देवरा यात्रा में भी भक्तों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। यात्रा दल में नाकोट पदान राजेंद्र सिंह नेगी, मनवर सिंह रावत, दलीप सिंह रावत, हरि सिंह रावत, भूपेंद्र राणा, सुरेन्द्र सिंह, विनोद खत्री, अनुराग खत्री, लक्ष्मण नेगी,और विपिन रावत सहित अनेक श्रद्धालु शामिल होकर भक्ति भाव से देव डोली के साथ चल रहे हैं। देव डोली के बेंजी आगमन ने न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवंत किया, बल्कि क्षेत्रीय सांस्कृतिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही देव आस्था को भी सशक्त रूप से उजागर किया।बृहस्पतिवार को देवरा यात्रा गंगतल गाँव और शुक्रवार को सिल्ली सेरा में प्रवास करेगी। 14 फरवरी को पुन: देवडोली अपने मूल मंदिर में विराजमान होगी।

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रविवार, 28 जून 2026

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