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आस्था के करोड़ों रुपये का हिसाब कौन देगा.? -राम मंदिर के बाद अब बीकेटीसी में भी दान पर सवाल – 20 दिन बीत गए, जांच रिपोर्ट अब तक गायब

गुणानंद जखमोला / देहरादून।। करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र बदरीनाथ-केदारनाथ धाम और उसका संचालन करने वाली बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। अयोध्या में दान राशि के दुरुपयोग के आरोपों के बाद अब उत्तराखंड में भी मंदिरों की चढ़ावे की रकम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

आरटीआई एकिटविस्ट अधिवक्ता विकेश नेगी के खुलासों के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जांच समिति गठित की थी। आरटीआई से खुलासा हुआ है कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की पुत्री नेहा जोशी, विधायक आशा नौटियाल समेत कई वीआईपी व्यक्तियों पर श्रद्धालुओं की दान राशि खर्च की गई। जांच समिति को 20 दिनों में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रिपोर्ट कहां अटक गई?

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क्या जांच पूरी हो चुकी है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया? श्रद्धालुओं के दान का हिसाब कब सामने आएगा? बीकेटीसी पर पहले भी समय-समय पर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में मांग उठ रही है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एसआईटी जांच कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।हर वर्ष चारधाम यात्रा में लगभग 50 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिनमें से करीब 25 लाख बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के दर्शन करते हैं। करोड़ों रुपये का चढ़ावा और दान मंदिर समिति को मिलता है। ऐसे में यह जानना हर श्रद्धालु का अधिकार है कि उसकी आस्था से जुड़ा धन आखिर कितना सुरक्षित है और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।

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शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

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