उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में डाक विभाग में बाहरी राज्यों के युवाओं की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सामाजिक और राजनीतिक मामलों पर मुखर रहने वाले डॉ. प्रेम बहुखण्डी ने सरकार के नाम खुली चिट्ठी लिखकर पहाड़ में डाकियों की भर्ती व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। देखिए….
डाकिया आया ……पिछले दो तीन साल से, डाक विभाग में हरियाणा के युवाओं की भर्ती का मामला सुर्ख़ियों में है. हाई स्कूल की परीक्षा में 90% – 95% प्रतिशत अंक वाले, इन युवाओं में से कईयों को अपना नाम भी लिखना नहीं आ रहा है, यह बात भी चर्चा में रही है। उत्तराखंड के बीजेपी समर्थक न तो कुछ बोल पा रहे हैं और न उनको यह समझ आ रहा है कि डाक विभाग की बहुत सामान्य सी नौकरी भी स्थानीय युवाओं से क्यों छीनी जा रही है?
मैं क्षेत्रवादी हूँ, पर अतिक्षेत्रवादी नहीं ! मैं पहले भी कहता रहा हूँ कि मेरे गांव में अगर इंटर कॉलेज में कोई बाहरी क्षेत्र का प्रवक्ता पढ़ाने आये तो उसका स्वागत होना चाहिए, कोई क्लास -2 या क्लास -1 का अफसर आये तो उसका भी मैं स्वागत करूँगा. स्कूल कॉलेज के प्रधानाचार्य भी अगर देश विदेश के होंगे तो उनका भी स्वागत होना चाहिए, क्योंकि इसी से सभ्यता का विकास होगा। लेकिन चपरासी- क्लर्क, होटल में सर्विस करने वाले, वर्तन धोने वाले, राजमिस्त्री का सहायक, तो कम से कम स्थानीय होने चाहिए. इसमें कौन सी विशेषज्ञता की जरूरत पड़ती है? फिर डाक बांटने वाला व्यक्ति तो अगर नितांत स्थानीय हो, जिसे रास्तों का पता हो, तो ज्यादा बेहतर होगा. मुझे कई बार पहाड़ में, हरियाणा के युवा मिले- दो बार तो मैंने उन्हें लिफ्ट भी दी, एक बार मेरे साथ वरिष्ठ पत्रकार Trilochan Bhatt जी भी थे। अब मुझे समझ नहीं आ रहा है कि ऐसा कौन सा नीतिगत बदलाव किया बीजेपी सरकार ने कि पहाड़ के नौजवान डाकिये भी नहीं बन पा रहे हैं?
क्या डाक बाँटने के लिए हाई स्कूल में 90% प्रतिशत अंक लाना जरूरी है?
अगर किसी के हाई स्कूल में 90% अंक आ रहे हैं तो क्या वो पहाड़ के दूरस्थ गांव में डाकिया बनाना पसंद करेगा, वो भी अगर वह हरियाणा जैसे विकसित प्रदेश का हो तो?मेरा सरकार और बीजेपी के समर्थकों से निवेदन है कि जरा आँखें खोलें, इससे पहले कि कोई हरियाणा का लड़का या पहाड़ का लड़का जेल जाये ( दोनों मुद्दों में लड़की कॉमन शब्द है), तत्काल इन युवाओं का ट्रान्सफर मैदानी क्षेत्र में किया जाये और पहाड़ में नए सिरे से, ब्लॉक स्तर या जिला स्तर पर डाकियों की भर्ती हो.
(विशेष: कल से एक हरियाणा की लड़की का विडियो सोशल मीडिया में चल रहा है जो डाकिया है और डाक नहीं बाँटती है, जब स्थानीय युवा ने विरोध किया तो वो उसे फंसाने की धमकी दे रही है)
#drprembahukhandi


सरकार से बहुत कुछ बोलती









