दस्तक पहाड न्यूज रुद्रप्रयाग, 02 जून। जनपद रुद्रप्रयाग के रतूड़ा क्षेत्र में एक महिला पर बंदर के हमले की घटना सामने आई है। हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने महिला के सिर पर कई टांके लगाए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रतूड़ा निवासी श्रीमती कमला देवी अपने आवास पर थीं, तभी अचानक एक बंदर ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई। आसपास के लोगों की मदद से उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) रुद्रप्रयाग को मंगलवार सायं 7:04 बजे व्हाट्सएप के माध्यम से घटना की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलने के बाद संबंधित वन विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए अवगत कराया गया।घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने आबादी वाले क्षेत्रों में बढ़ रही बंदरों की गतिविधियों पर चिंता जताते हुए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे वन्यजीवों की गतिविधियों के प्रति सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति अथवा वन्यजीव हमले की सूचना तत्काल संबंधित विभागों को दें।
बंदर के आतंक पर सरकार की चुप्पी, पहाड़ में खेती-किसानी के साथ जीवन भी संकट में : पहाड़ के पर्वतीय क्षेत्रों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। कभी किसानों की मेहनत से तैयार फसलें बंदरों के झुंड उजाड़ देते हैं, तो कभी लोगों पर हमले कर उन्हें घायल कर देते हैं। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला रुद्रप्रयाग जनपद के रतूड़ा क्षेत्र का है, जहां एक महिला पर बंदर ने हमला कर दिया और उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं। यह कोई पहली घटना नहीं है। प्रदेश के कई जिलों से आए दिन बंदरों के हमले और फसलों को नुकसान पहुंचाने की खबरें सामने आती रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के डर से कई किसानों ने खेती करना तक छोड़ दिया है। खेत बंजर होते जा रहे हैं और पलायन की समस्या और गहरा रही है। वहीं दूसरी ओर आबादी वाले क्षेत्रों में बढ़ती बंदरों की संख्या लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार और संबंधित विभाग केवल आश्वासन तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस और दीर्घकालिक समाधान दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों ने बंदरों के आतंक से राहत दिलाने के लिए प्रभावी नीति बनाने और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। जब फसलें सुरक्षित नहीं, किसान सुरक्षित नहीं और आमजन भी हमलों का शिकार हो रहे हैं, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बंदरों की बढ़ती समस्या का स्थायी समाधान कब निकलेगा?
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