दीपक बेंजवाल / दस्तक पहाड़ न्यूज अगस्त्यमुनि।।पहाड़ की महिलाएं सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में साहस और आत्मबल की मिसाल भी होती हैं। इसका जीवंत उदाहरण रुद्रप्रयाग जनपद की बसुकेदार तहसील के कोटी पठालीधार गांव की 65 वर्षीय नारायणी देई देवी ने पेश किया, जिन्होंने गुलदार के जानलेवा हमले के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और हाथ में मौजूद दरांती से मुकाबला कर अपनी जान बचा ली।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर नारायणी देई देवी, पत्नी पुष्कर सिंह रावत, गांव के खेतों के किनारे घास काट रही थीं। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके हाथ, पैर और शरीर के कई हिस्सों पर गहरे घाव हो गए और वह लहूलुहान हो गईं। लेकिन भय के आगे झुकने के बजाय नारायणी देवी ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। उन्होंने घास काटने वाली दरांती उठाकर गुलदार का डटकर सामना किया, जिससे गुलदार पीछे हट गया और जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद नारायणी देवी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी घास की कंडी उठाई और किसी तरह घर तक पहुंचीं। मां को खून से लथपथ देखकर उनके पुत्र पंकज तुरंत उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अगस्त्यमुनि लेकर पहुंचे।
सीएचसी अगस्त्यमुनि में तैनात डॉ. निधि ने बताया कि महिला के हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे जख्म हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम अस्पताल पहुंची, जबकि एक अन्य टीम कोटी गांव में मौके पर जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए रवाना की गई।
बढ़ते गुलदार के हमलों ने बढ़ाई चिंता
रुद्रप्रयाग जनपद में इस वर्ष गुलदार के हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार बढ़ रहे हमलों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। खासकर महिलाएं और किसान, जो रोजाना जंगल और खेतों में काम करने जाते हैं, सबसे अधिक जोखिम में हैं। नारायणी देवी का साहस निश्चित रूप से प्रेरणादायक है, लेकिन यह घटना वन्यजीव-मानव संघर्ष की गंभीर होती समस्या की भी याद दिलाती है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, गुलदार की निगरानी करने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।


दरांती लेकर गुलदार से भिड़








