दस्तक पहाड न्यूज चरबंग / चमोली।। शनिवार रात मां नंदा की ऐतिहासिक बड़ी जात यात्रा अपने पहले पड़ाव चरबंग गांव पहुंची। मां नंदा की डोली के गांव में प्रवेश करते ही श्रद्धा और आस्था का माहौल बन गया। चरबंग गांव के भूम्याल, गोरिया राजा और देवी के पश्वाओं ने अवतरित होकर मां नंदा का स्वागत किया।
इस दौरान कुरुड़ से पहुंचे पुजारियों ने पारंपरिक गीतों और स्तवन के माध्यम से मां नंदा की आराधना की। देवी के आगमन पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की और यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया।
ग्राम प्रधान श्रीमती हीरा देवी, युवक मंगल दल के अध्यक्ष एवं ग्रामीणों ने बड़ी जात यात्रा में शामिल सभी यात्रियों का माला और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया। गांव में देर रात तक मां नंदा के जागर गूंजते रहे। जागर और पौराणिक गाथाओं के माध्यम से नंदा मैती मुल्क के वैभव, गौरा-शिव की महिमा और समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों का बखान किया गया।
इस अवसर पर लोकगायक धर्म सिंह राणा ‘धर्मू भाई’ ने अपने भावपूर्ण खुदेड़ गीत की प्रस्तुति दी। गीत में पहाड़ की पीड़ा, मां नंदा के प्रति श्रद्धा और मायके से विदाई की भावनाओं का ऐसा मार्मिक चित्रण हुआ कि वहां मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे। खुदेड़ की मार्मिक धुनों ने रात के आध्यात्मिक माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया। मां नंदा की बड़ी जात के इस ऐतिहासिक पड़ाव पर जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी चमोली और पुलिस अधीक्षक चमोली भी मौजूद रहे।इस अवसर पर गांव के पधान रघुवीर सिंह, भूम्याल पश्वा लक्ष्मण सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।चरबंग में मां नंदा की डोली के आगमन से पूरा गांव भक्तिमय हो उठा। रातभर चले जागर, पौराणिक गाथाओं और खुदेड़ गीतों ने नंदा लोक की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा और मां नंदा के प्रति अटूट आस्था को जीवंत कर दिया।
सिद्धपीठ कुरुड से हिमालयी यात्रा की अलौकिक शुरुआत! :अगाध श्रद्धा, अटूट विश्वास और वेदना से भरे ‘ध्याणियों’ (बेटियों) के भावुक विदाई गीतों के बीच शनिवार को सिद्धपीठ कुरुड मंदिर से भगवती मां नंदा और मां राज राजेश्वरी की पवित्र देव डोली उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए प्रस्थान कर गई है। इस अलौकिक और विहंगम क्षण के साक्षी बनने के लिए तड़के से ही हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु कुरुड धाम पहुँचे। प्रात:काल से ही कुरुड़ के मुख्य गौड़ पुजारियों द्वारा मां नंदा एवं राज राजेश्वरी का महाअभिषेक एवं विशेष श्रृंगार पूजन संपन्न किया गया। इसके उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ देव डोलियों को गर्भगृह से बाहर लाया गया।अश्रुपूरित आंखों से ‘ध्याणी’ की विदाई: लोक परंपरा के अनुसार मां नंदा को ध्याणी (बेटी) मानकर स्थानीय ग्रामीण भावुक मन से विदा कर रहे हैं। परंपरागत मांगल गीतों और ढोल-दमाऊ की गूंज से संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है।हिमालयी पड़ावों की ओर कदम: सिद्धपीठ कुरुड से प्रस्थान कर देव डोली अपने तय पड़ावों से होते हुए उच्च हिमालय की ओर बढ़ेगी, जहां विभिन्न पूजा-विधान संपन्न किए जाएंगे।पूरा कुरुड क्षेत्र ‘जय मां नंदा’ और ‘जय राज राजेश्वरी’ के जयकारों से गुंजायमान है। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा सुरक्षा एवं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।


नंदा बड़ी जात का दिव्य









