दस्तक पहाड न्यूज ऊखीमठ। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ को आवश्यक चिकित्सकीय एवं अन्य पदों के सृजन के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के रूप में उच्चीकृत किए जाने का शासनादेश जारी होने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल का आभार जताते हुए इसे क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि ऊखीमठ भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है और चारधाम एवं पंचकेदार यात्रा का प्रमुख पड़ाव भी है। ऐसे में यहां स्थानीय लोगों के साथ तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता है। CHC के रूप में उच्चीकरण से क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासी लंबे समय से PHC ऊखीमठ के उच्चीकरण की मांग कर रहे थे और इस विषय को लगातार शासन एवं सरकार के समक्ष उठाया गया। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के समाधान और क्षेत्र के विकास के लिए वह निरंतर प्रयासरत हैं।
ज्येष्ठ प्रमुख राकेश नेगी ने विधायक आशा नौटियाल का आभार जताते हुए कहा कि विधायक ने इस जनहित के विषय को शासन और सरकार के समक्ष लगातार उठाया और उनके प्रयासों से यह मांग पूरी हुई है। इस अवसर पर ज्येष्ठ प्रमुख राकेश नेगी, प्रधान संगठन महामंत्री मदन भट्ट, मंडल अध्यक्ष दलबीर नेगी, प्रदीप राणा, नीमा देवी, विशाम्बरी देवी, विनोद नेगी, राजेंद्र सिंह, सरिता देवी, आशा देवी, बृजेश पंत, यशोदा देवी, शिशुपाल सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
लेकिन उठ रहा एक बड़ा सवाल—आंदोलनरत जनता की जीत का क्या ?
शासनादेश जारी होने के साथ ही अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में एक दूसरा सवाल भी उठ रहा है। ऊखीमठ CHC की मांग को लेकर स्थानीय जनता लगातार 28 दिनों तक आंदोलन पर बैठी रही। ऐसे में क्या इस शासनादेश को केवल राजनीतिक प्रयासों की सफलता माना जाए या फिर लंबे समय तक आंदोलन करने वाली जनता की भूमिका को भी बराबर का श्रेय मिलना चाहिए ?
आंदोलन से जुड़े लोगों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शासनादेश बिना किसी जन आंदोलन के विधायक के प्रयासों से ही जारी हो जाता, तो इसका पूरा श्रेय विधायक आशा नौटियाल को दिया जाता। लेकिन जब अपनी ही मांग को लेकर क्षेत्र की जनता को 28 दिनों तक आंदोलन करना पड़ा, तब इस उपलब्धि को केवल किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम बताना कितना उचित है?स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि आंदोलन ने सरकार और शासन पर दबाव बनाने का काम किया। ऐसे में शासनादेश जारी होने के बाद जनता के 28 दिन के संघर्ष को भी सम्मान और श्रेय मिलना चाहिए। अब सवाल यही है कि ऊखीमठ CHC का शासनादेश सिर्फ विधायक की राजनीतिक पहल की जीत है, या फिर विधायक के प्रयासों और आंदोलनरत जनता के संघर्ष—दोनों की संयुक्त जीत?यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण की मांग लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांगों में शामिल रही है और इसके लिए स्थानीय जनता को सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ा।










