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फलेश्वरि माँ चण्डिका बाणातोली में वैदिक मंत्रों के साथ बन्याथ यज्ञ प्रारंभ, गरुड़झाड़ा, शीरा बौट परंपरा देखने उमड़े श्रद्धालु

दस्तक पहाड न्यूज फलासी।। तल्ला नागपुर की अधिष्ठात्री फलेश्वरी माँ चण्डिका की देवरा यात्रा पूर्ण होने के उपरांत बन्याथ महायज्ञ का शुभारंभ आज विधि-विधान के साथ हो गया। बुधवार को प्राचीन सिलघणा परंपरा का निर्वहन करते हुए माँ भगवती ने सिलांगी वृक्ष के नीचे विश्राम किया।बृहस्पतिवार प्रातःकाल माली द्यूली में गरुड़ झाड़ा परंपरा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस परंपरा के अंतर्गत माँ चण्डिका बन्याथ के बलदेव की विदाई होती है, जहां भगवान नारायण स्वरूप बलदेव को गरुड़ भगवान के माध्यम से विदा किया जाता है। इसके पश्चात माँ भगवती की ब्रह्म शक्ति भक्तों की अपार भीड़ के साथ अपनी बणातोली पहुंची, जहां शीरा-बोट प्रक्रिया प्रारंभ की गई। शीरा-बोट में माँ चण्डिका के मैती जाखणी ग्रामवासियों द्वारा शीरा (बबला घास) से बर्त (रस्सी) बनाई जाती है, जो यज्ञ के दौरान प्रतिदिन तैयार की जाती है तथा पूर्णाहुति के पश्चात देवी का प्रसाद (माथम) मानकर भक्तों में वितरित किया जाता है। माँ भगवती अपनी ध्याणियों से मिलते हुए आशीर्वाद देकर यज्ञस्थली में पहुंची और कुंडगज करवाया। श्री तुंगेश्वर मंदिर समिति द्वारा यज्ञार्थी बेंजी, मयकोटी, क्यूड़ी, चौण्ड गांव के सभी ब्राह्मणों का यज्ञ के लिए वरण किया गया। कुंड पूजन के उपरांत विधिवत रूप से महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। इस दौरान पंचकोटी क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों से बड़ी संख्या में ग्रामीण इस आयोजन में शामिल हुए। चरणों में बैठे ब्राह्मणों द्वारा नौ दिन तक वेद मंत्रों के साथ महायज्ञ किया जाएगा।मंदिर समिति के अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह बर्त्वाल ने बताया कि 25 वर्षों बाद आयोजित हो रहे इस बन्याथ महायज्ञ में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि माँ भगवती छह माह की देवरा यात्रा पूर्ण कर अपनी बणतोली में महायज्ञ के लिए विराजमान हो गई हैं। नौ दिन तक विशाल महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। 7 मई को जलयात्रा और 8 मई को पूर्णाहुति होगी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से माँ भगवती के दर्शन करने एवं इस पावन महायज्ञ में सहभागिता करने की अपील की।माँ चण्डिका के ब्रह्मगुरु पंडित जगदम्बा प्रसाद बेंजवाल ने बताया कि यह महायज्ञ प्राचीन धार्मिक परंपराओं और लोक आस्था का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि सभी अनुष्ठान वैदिक विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की जा रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे श्रद्धा और आस्था के साथ इस महायज्ञ में सहभागी बनें और माँ भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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