दस्तक पहाड़ न्यूज अगस्त्यमुनि। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि के मुख्य गेट के समीप केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर राहगीरों की सुविधा के लिए बनाया गया प्रतीक्षालय अब अपने मूल उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। यहां दिन-रात बेतरतीब तरीके से बाइक खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे यात्रियों, बुजुर्गों, महिलाओं और साधु-संतों को बैठने और विश्राम करने की जगह तक नहीं मिल पाती।
स्थानीय निवासी मयंक नेगी कहते है “यह प्रतीक्षालय राहगीरों को धूप, बारिश और थकान से राहत देने के लिए बनाया गया था, लेकिन अक्सर इसके भीतर ही दोपहिया वाहन खड़े होने के कारण आम नागरिक इसका उपयोग नहीं कर पाते। कई बार दूर-दराज से पैदल आने वाले यात्री कुछ देर बैठकर आराम करना चाहते हैं, मगर बाइक की कतारें उन्हें वहां से लौटने को मजबूर कर देती हैं। यह केवल यातायात या पार्किंग का मुद्दा नहीं, बल्कि सिविक सेंस (नागरिक जिम्मेदारी) का भी प्रश्न है। सार्वजनिक सुविधाएं सभी के लिए होती हैं, न कि निजी पार्किंग के रूप में इस्तेमाल करने के लिए। थोड़ी-सी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से इस समस्या से बचा जा सकता है। अब सवाल यह है कि इस बदलाव की शुरुआत कौन करेगा? क्या युवा स्वयं अपनी आदतों में सुधार लाएंगे, या फिर प्रशासन को ऐसे सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी और आवश्यक कार्रवाई करनी पड़ेगी?
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और उसका सही उपयोग करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि हम छोटी-छोटी नागरिक जिम्मेदारियों का पालन नहीं करेंगे, तो बेहतर समाज और बेहतर व्यवस्था की उम्मीद भी अधूरी ही रहेगी।


प्रतीक्षालय बना ‘पार्किंग’, बाइकर्स युवाओं









