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Dastak Pahad Team

माँ चण्डिका फलासी महायज्ञ के आठवें दिन निकली दिव्य जलयात्रा, श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़

दस्तक पहाड न्यूज चोपता।। रुद्रप्रयाग जनपद के फलासी गांव स्थित माँ चण्डिका बन्याथ महायज्ञ में आज आठवें दिन भव्य जलकलश यात्रा का आयोजन किया गया। जिसमें पंचकोटि गांवों की 108 कन्याओं द्वारा पारंपरिक व धार्मिक विधि-विधान के साथ जलकलश यात्रा निकाली गयी।बृहस्पतिवार प्रातःकाल पंचांग पूजा, हवन के बाद सिराकुंजी में वरुण देव का आवाह्न कर प्रधान नाग देवता का पूजन करके जल से पूरित किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा कैलाश बेंजवाल एवं आचार्य प्रवीण प्रकाश बेंजवाल द्वारा जलधारा एवं जलकलशो का पूजन के पश्चात भव्य दिव्य जलयात्रा प्रारंभ हुई। जलयात्रा में भगवान शंकर, माता पार्वती, नंदी की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। जलयात्रा में प्रथम देव कलश श्री तुंगनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी त्रिलोचन भट्ट जी द्वारा लाया गया। जिसके उपरांत वर्द्धनी कलश जगपति मानवेन्द्र सिंह बर्त्वाल, ब्रह्मा कलश आशुतोष नेगी, विष्णु कलश कैप्टन दलवीर सिंह राण, रुद्र कलश संजीव बर्त्वाल एवं 108 कन्याओं द्वारा जलकलश लाऐ गये। सिराकुंजी से जलयात्रा भद्र मंडप में पहुँची जहाँ ब्रह्मगुरु पंडित जगदम्बा प्रसाद बेंजवाल द्वारा द्वार पूजा के पश्चात मां चण्डिका और श्री तुंगेश्वर भगवान, भूतेर क्षेत्रपाल एवं भद्र मंडप में स्थापित समस्त देवताओं के अभिसिंचित करके वर्द्धनी कलश द्वारा यज्ञाचार्य पंडित चंद्र मोहन वशिष्ठ जी द्वारा मंत्रोच्चार करते हुए यज्ञ ब्रह्म पंडित चंद्र प्रकाश बेंजवाल एवं भूदेवों के द्वारा यज्ञभगवान का अभिसिंचन किया गया।आचार्य अनिल बेंजवाल जी ने बताया कि जलयात्रा का विशेष धार्मिक महत्व होता है। यह यात्रा गंगा अवतरण का प्रतीक मानी जाती है, जिसमें पवित्र जल को कलशों में भरकर श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ मंडप तक लाया जाता है। यात्रा में सबसे पहले देव कलश आता है जिससे मां चण्डिका और भगवान तुंगनाथ जी का अभिषेक किया जाता है। जिसके पश्चात दूसरा कलश को वर्द्धनी कलश कहा जाता है, जो सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है। जिससे यज्ञ भगवान की पूजा की जाती हघ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जलकलश यात्रा वातावरण की शुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा के संचार और देव शक्तियों के आह्वान का माध्यम मानी जाती है। यज्ञ में प्रयुक्त पवित्र जल को जीवन, आस्था और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। कन्याओं द्वारा जलकलश धारण करना देवी शक्ति और पवित्रता का स्वरूप माना जाता है।

फलासी गांव में 25 वर्षों बाद आयोजित हो रहे इस भव्य माँ चण्डिका बन्याथ महायज्ञ को लेकर क्षेत्र में भारी उत्साह बना हुआ है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। इस अवसर पर मन्दिर समिति के मंदिर समिति के कल्याण सिंह नेगी, दलवीर सिंह राणा , मदन सिंह नेगी , यशवंत सिंह नेगी, रणजीत सिंह, सते सिंह नेगी, जिला पंचायत सदस्य चोपता संपन्न नेगी, धीर सिंह झिंक्वाण सहित पंचकोटी के ग्रामीण और बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।

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रविवार, 25 अक्तूबर 2026

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