दस्तक पहाड न्यूज मनसूना।। बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा-निर्देशन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रुद्रप्रयाग के तत्वावधान में दूरस्थ ग्राम मनसूना में विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती पायल सिंह ने की।शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बाल अधिकारों के संरक्षण को बढ़ावा देना, बाल श्रम के प्रति जन-जागरूकता फैलाना तथा आमजन को उनके विधिक अधिकारों एवं निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी देना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिव श्रीमती पायल सिंह ने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 (संशोधित 2016) के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी दुकान, होटल, ढाबे, घरेलू कार्य या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में रोजगार देना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी नियोक्ता को 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा तथा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।उन्होंने यह भी बताया कि 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को निर्माण कार्य, भारी मशीनरी संचालन, ईंट-भट्ठों और अन्य जोखिमपूर्ण उद्योगों में कार्य पर लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित है। उन्होंने बच्चों की शिक्षा एवं सुरक्षा को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए बाल श्रम के खिलाफ जनसहभागिता का आह्वान किया।
सचिव महोदया ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत विद्यालयों में प्रवेश दिलाने तथा किसी भी प्रकार के शोषण अथवा अधिकार हनन की स्थिति में न्याय दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने लोगों को NALSA हेल्पलाइन 15100 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी भी दी।
शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के रिटेनर अधिवक्ता एवं असिस्टेंट लीगल डिफेंस काउंसिल ने बाल श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों, बच्चों के अधिकारों और निःशुल्क विधिक सहायता सेवाओं की जानकारी दी। साथ ही बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास एवं शिक्षा के अधिकार पर भी विस्तार से चर्चा की गई।कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं एवं शिकायतों को सुनकर उन्हें आवश्यक विधिक परामर्श प्रदान किया गया। साथ ही लोक अदालत, निःशुल्क विधिक सहायता एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर लोगों को जागरूक किया गया। ग्रामीणों ने इस प्रकार के जागरूकता शिविरों को समाज के लिए उपयोगी बताते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल की सराहना की।











